संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वैश्विक मानचित्रों में सुधार करने के लिए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। भारत ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि मानचित्रों को महाद्वीपों का सटीक प्रतिनिधित्व करना चाहिए।

  • UNGA ने 'Correct the Map' प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित किया।
  • भारत सहित 164 देशों ने इस सुधार का समर्थन किया।
  • प्रस्ताव का उद्देश्य मानचित्रों में होने वाले भौगोलिक विरूपण (distortion) को कम करना है।
  • अमेरिका एकमात्र देश था जिसने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 193 सदस्यों ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए '“Correct the map”: rebalancing global cartographic representation and promoting equitable representation of the world’s regions, particularly Africa' नामक प्रस्ताव को भारी बहुमत से स्वीकार कर लिया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मानचित्रों में महाद्वीपीय भूभागों के चित्रण को अधिक सटीक बनाना है, ताकि दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का प्रतिनिधित्व संतुलित रूप से हो सके।

इस प्रस्ताव को टोगो द्वारा प्रायोजित किया गया था, जिसे महासभा में 164 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ। दिलचस्प बात यह है कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर संयुक्त राज्य अमेरिका एकमात्र ऐसा देश था जिसने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन जैसे देशों ने इस मामले में मतदान से परहेज किया।

मानचित्रों में समस्या क्या है?

वर्तमान में दुनिया भर में 16वीं शताब्दी के मर्केटर प्रोजेक्शन (Mercator projection) का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। हालांकि इसे मूल रूप से समुद्री नेविगेशन के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन शिक्षा, मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसके उपयोग से भूमध्य रेखा से दूर स्थित उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के आकार में भारी विरूपण दिखाई देता है। इससे अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे विशाल क्षेत्रों का वास्तविक आकार छोटा दिखाई देता है, जो वैश्विक धारणा को प्रभावित करता है।

मानचित्र केवल भूगोल नहीं दिखाते, वे दुनिया को देखने के हमारे नजरिए को भी आकार देते हैं।

BozokMedia विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बदलाव केवल भूगोल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन और धारणा (perception) से जुड़ा है। जब मानचित्रों में कुछ क्षेत्रों को छोटा दिखाया जाता है, तो अनजाने में उनकी भू-राजनीतिक और आर्थिक महत्ता को भी कम करके आंका जाता है। भारत का समर्थन इस बात का संकेत है कि विकासशील देश अब वैश्विक मंच पर अपनी सटीक पहचान और प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव, रागहू पुरी ने मतदान के स्पष्टीकरण में कहा कि भारत इस प्रस्ताव के पीछे के इरादे का स्वागत करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज भूगोल और दुनिया के सापेक्ष पैमाने को समझने के लिए मानचित्रों का उपयोग करते हैं। हालांकि, भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समर्थन किसी विशिष्ट मानचित्र प्रोजेक्शन (जैसे Equal Earth) के लिए नहीं, बल्कि 'इक्वल एरिया' मानचित्रों के व्यापक उपयोग के लिए है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मर्केटर प्रोजेक्शन का आविष्कार 1569 में गेरार्डस मर्केटर द्वारा किया गया था। यह नेविगेशन के लिए उत्कृष्ट है क्योंकि यह दिशाओं को सटीक रूप से दिखाता है, लेकिन यह भूमि के आकार को अत्यधिक विकृत कर देता है। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटल युग में प्रवेश कर रही है, इस पुराने मॉडल को अपडेट करना अनिवार्य हो गया है।

Did You Know?: मर्केटर मानचित्र पर ग्रीनलैंड का आकार अफ्रीका के लगभग बराबर दिखता है, जबकि वास्तव में अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है!

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य मानचित्रों में होने वाले भौगोलिक विरूपण को ठीक करना और सभी महाद्वीपों का सटीक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है।

प्रश्न 2: भारत ने इस पर क्या रुख अपनाया?
उत्तर: भारत ने प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह किसी एक विशिष्ट मानचित्र तकनीक के बजाय अधिक सटीक 'इक्वल एरिया' प्रोजेक्शन के उपयोग का समर्थन है।