किर्गिस्तान में संपन्न हुए SCO शिखर सम्मेलन में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और मध्य एशिया के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कनेक्टिविटी और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का संदेश दिया।

  • भारत ने आतंकवाद को 'राज्य की नीति के उपकरण' के रूप में उपयोग करने वाले देशों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।
  • मध्य एशिया के प्राकृतिक संसाधनों (तेल, गैस, खनिज) तक पहुंच बनाना भारत का मुख्य लक्ष्य है।
  • चाहबहार बंदरगाह और INSTC के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर।
  • भारत ने खुद को पूर्व और पश्चिम के बीच एक 'ब्रिज-बिल्डर' के रूप में स्थापित किया है।

हाल ही में किर्गिस्तान के बिश्केक में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है। शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए 'बिश्केक घोषणापत्र' में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया गया, जिसमें विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद पर प्रहार किया गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मंच का उपयोग आतंकवाद के खिलाफ एक वैश्विक संदेश देने के लिए किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को 'राज्य की नीति के एक उपकरण' के रूप में उपयोग करने वाले देशों को कड़ा संदेश भेजने की आवश्यकता है। यह भारत की उस निरंतर नीति का हिस्सा है जहाँ वह सुरक्षा और स्थिरता को सर्वोपरि मानता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि SCO केवल एक राजनयिक मंच नहीं है, बल्कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव का एक महत्वपूर्ण द्वार है। मध्य एशियाई देश, जिन्हें भारत अपने 'विस्तारित पड़ोस' का हिस्सा मानता है, खनिज, तेल और गैस जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं। इन देशों के साथ गहरे संबंध भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अनिवार्य हैं।

भारत को अपनी 'सॉफ्ट पावर' को मध्य एशिया में बेहतर आर्थिक संबंधों और मजबूत कनेक्टिविटी के माध्यम से 'हार्ड गेन्स' में बदलने की चुनौती का सामना करना होगा। - राजदूत अशोक सज्जनहार (सेवानिवृत्त)

कनेक्टिविटी के मामले में, भारत के पास पाकिस्तान के माध्यम से ताजिकिस्तान तक कानूनी पहुंच तो है, लेकिन वास्तविक (de facto) पहुंच नहीं है। इस बाधा को दूर करने के लिए भारत ईरान के माध्यम से चाहबहार बंदरगाह और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह 7,200 किलोमीटर लंबा गलियारा भारत को रूस, मध्य एशिया और यूरोप से जोड़ने की क्षमता रखता है।

रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के संदर्भ में, पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बॉन्डेमी यह दर्शाती है कि भारत किसी एक गुट का हिस्सा नहीं है। भारत दुनिया को विभाजित होने से बचाने के लिए एक 'ब्रिज-बिल्डर' की भूमिका निभा रहा है, जो पूर्व और पश्चिम दोनों के साथ सामंजस्य बिठाने में सक्षम है।

Did You Know?: INSTC एक विशाल परिवहन गलियारा है जो भारत को यूरोप के बाजारों तक तेजी से और सस्ता रास्ता प्रदान कर सकता है।

Frequently Asked Questions

1. SCO भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह भारत को मध्य एशियाई देशों के साथ आर्थिक, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

2. भारत कनेक्टिविटी के लिए किन रास्तों का उपयोग कर रहा है?
भारत मुख्य रूप से ईरान के माध्यम से चाहबहार बंदरगाह और INSTC कॉरिडोर का उपयोग कर रहा है ताकि पाकिस्तान के बिना मध्य एशिया तक पहुंचा जा सके।