चीन ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग सांगपो) पर एक विशाल मेगा बांध बनाने की अपनी योजना को तेज कर रहा है, जिससे भारत में जल सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। यह परियोजना मौजूदा थ्री गोर्जस बांध से तीन गुना बड़ी हो सकती है।

  • चीन ब्रह्मपुत्र नदी पर 1.2 ट्रिलियन युआन की लागत से मेगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट बना रहा है।
  • इसकी क्षमता 60 गीगावाट होगी, जो थ्री गोर्जस बांध से तीन गुना अधिक है।
  • भारत को नदी के प्रवाह में बदलाव और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा सता रहा है।
  • परियोजना की गोपनीयता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग सांगपो) के निचले हिस्सों पर एक विशाल मेगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना को गति देने का निर्णय लिया है। हाल ही में नेपाल-चीन सीमा पर आए हिमस्खलन और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं के बावजूद, बीजिंग अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना से पीछे हटने को तैयार नहीं है। 'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत संयंत्रों में से एक होगी, जो सीधे तौर पर भारतीय सीमा के पास स्थित है।

परियोजना का विशाल पैमाना

चीनी नेतृत्व ने इस परियोजना को "सदी की परियोजना" करार दिया है। चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने इसके लिए 1.2 ट्रिलियन युआन (लगभग 14 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की घोषणा की है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस परियोजना की स्थापित क्षमता 60 गीगावाट होगी, जो वार्षिक 300 बिलियन किलोवाट-घंटा बिजली पैदा करेगी। तुलनात्मक रूप से देखें तो यह वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े बांध, थ्री गोर्जस बांध की क्षमता से तीन गुना अधिक है।

चीन द्वारा नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने की यह क्षमता दक्षिण एशिया की जल-राजनीति (Hydro-politics) को पूरी तरह बदल सकती है।

भारत की चिंताएं और भू-राजनीतिक प्रभाव

भारत के लिए यह केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक खतरा है। मुख्य चिंता यह है कि चीन द्वारा पानी के भंडारण से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पानी की उपलब्धता कम हो सकती है या अचानक बांध से पानी छोड़े जाने पर विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। चीन का दावा है कि यह एक "रन-ऑफ-द-रिवर" मॉडल है, लेकिन विशेषज्ञों को डर है कि इसमें बड़े जलाशयों का निर्माण शामिल होगा जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करेंगे।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि ब्रह्मपुत्र पर चीन का यह नियंत्रण भारत के लिए 'वॉटर वॉरफेयर' (जल युद्ध) की स्थिति पैदा कर सकता है। यदि चीन नदी के बहाव को नियंत्रित करने में सक्षम हो जाता है, तो वह सूखे या बाढ़ के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाने के लिए पानी का उपयोग एक हथियार के रूप में कर सकता है।

Did You Know?: चीन का मौजूदा सांगमु बांध पहले से ही तिब्बत की लगभग 26% बिजली जरूरतों को पूरा कर रहा है।

Frequently Asked Questions

1. क्या यह बांध भारत में बाढ़ का कारण बन सकता है?
हाँ, यदि चीन अचानक भारी मात्रा में पानी छोड़ता है, तो इससे भारत के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Floods) का खतरा बढ़ सकता है।

2. इस परियोजना की कुल लागत कितनी है?
इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए चीन ने 1.2 ट्रिलियन युआन के निवेश की घोषणा की है।