नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गीरोंग पोर्ट को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। बचाव दल अब मलबे के बीच से शवों को निकालने और लापता लोगों की तलाश करने में जुटे हैं।

  • ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ ने गीरोंग सीमा पार को पूरी तरह मलबे में बदल दिया है।
  • अब तक दोनों ओर से 1,300 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
  • चीन की ओर से 519 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

गीरोंग, तिब्बत: चीन और नेपाल के बीच व्यापार का मुख्य केंद्र रहा गीरोंग पोर्ट अब केवल मलबे का एक काला ढेर बनकर रह गया है। 26 अगस्त को नेपाल की ओर से एक ग्लेशियर के ढहने के बाद आई 'सुनामी जैसी' मलबे की लहर ने इस महत्वपूर्ण सीमा पार को पल भर में तहस-नहस कर दिया। रविवार को चीनी अधिकारियों ने बताया कि बचाव दलों ने मलबे से 12 और शव बरामद किए हैं, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।

बचाव कार्य में जुटे कर्मी चमकीले नारंगी रंग की वर्दी में खुदाई करने वाली मशीनों (excavators), फावड़ों और ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग रडार का उपयोग कर रहे हैं। आपदा का दृश्य इतना भयानक है कि पांच मंजिला चीनी सीमा शुल्क (customs) भवन का नामोनिशान मिट चुका है। अब वहां केवल एक पानी की मीनार का हिस्सा और मलबे के बीच लहराता एक चीनी ध्वज ही दिखाई देता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह आपदा केवल एक मानवीय त्रासदी नहीं है, बल्कि यह हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों का एक गंभीर संकेत है। गीरोंग पोर्ट न केवल चीन और नेपाल के बीच व्यापार का द्वार था, बल्कि यह हिंदू और बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए माउंट कैलाश जाने का एक प्रमुख मार्ग भी था।

हिमालयी ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और अचानक आने वाली ये बाढ़ पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है।

इस आपदा में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। चीन की ओर से 43 मौतें दर्ज की गई हैं और 519 लोग लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जिससे यह एक अंतरराष्ट्रीय संकट बन गया है। राजनयिकों ने चीन पर जानकारी साझा करने में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है, विशेष रूप से डीएनए पहचान और चेहरे की पहचान वाले फुटेज के संबंध में।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गीरोंग ऐतिहासिक रूप से एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है। 2015 के भूकंप के बाद जब पूर्वी मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था, तब यह नेपाल और तिब्बत के बीच व्यापार और यात्रियों के लिए मुख्य मार्ग बन गया था। यह मार्ग इलेक्ट्रिक वाहनों सहित चीनी निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण था।

क्या आप जानते हैं?: चीनी वैज्ञानिकों ने हिमालय में 3,000 से अधिक ग्लेशियर झीलों की पहचान की है, जिनमें से 187 को अत्यधिक जोखिम वाला माना गया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: गीरोंग पोर्ट में यह आपदा कैसे आई?
उत्तर: नेपाल की ओर से एक ग्लेशियर के अचानक ढहने से पानी, मिट्टी और मलबे की एक विशाल लहर आई, जिसने सीमा पार को नष्ट कर दिया।

प्रश्न 2: इस आपदा में कितने भारतीय नागरिक लापता हैं?
उत्तर: राजनयिकों के अनुसार, लापता लोगों में 49 भारतीय नागरिक शामिल हैं।