संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि वर्तमान एल नीनो का प्रभाव पिछले सभी वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ सकता है। इससे दुनिया भर में भीषण गर्मी, तूफान और खाद्य संकट का खतरा पैदा हो गया है।
- एल नीनो इस साल पिछले सभी तापमान रिकॉर्ड तोड़ सकता है।
- अगस्त का तापमान औसत से 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।
- दुनिया भर में लगभग 50 करोड़ लोगों के खाद्य संकट में फंसने का खतरा है।
- जापान से हवाई तक चार शक्तिशाली तूफानों का सक्रिय होना।
मेलबर्न: जलवायु परिवर्तन के विशेषज्ञों और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने एक अत्यंत गंभीर चेतावनी जारी की है। वर्तमान एल नीनो (El Niño) घटना के कारण पृथ्वी एक ऐसे 'खतरनाक मंडल' में प्रवेश कर रही है, जहाँ तापमान के पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एल नीनो चक्र पिछले दशकों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली और अनिश्चित है।
आमतौर पर एल नीनो का प्रभाव नवंबर और जनवरी के बीच अपने चरम पर होता है, लेकिन इस वर्ष यह असामान्य रूप से समय से पहले ही वैश्विक तापमान में भारी वृद्धि कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने का सापेक्ष सूचकांक औसत से 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है। यह संकेत देता है कि 2027 तक वैश्विक तापमान के नए शिखर छूने वाले हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल तापमान बढ़ने की बात नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानव अस्तित्व के लिए एक सीधा खतरा है। एल नीनो का प्रभाव समुद्र के तापमान से लेकर कृषि उत्पादन तक सब कुछ प्रभावित करता है। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पूरी तरह चरमरा सकती है।
एल नीनो का वर्तमान स्वरूप प्राकृतिक चक्र से कहीं अधिक तीव्र है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती पेश कर रहा है।
वर्तमान में इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से देखे जा रहे हैं। इंडोनेशिया भीषण जंगलों की आग (Wildfires) से जूझ रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर गया है। प्रशांत महासागर के क्षेत्र में भी हलचल तेज है; जहाँ सामान्यतः एक या दो तूफान आते हैं, वहीं इस साल जापान से लेकर हवाई तक चार शक्तिशाली तूफान सक्रिय हैं।
इस जलवायु आपदा का सबसे डरावना पहलू मानवीय संकट है। अनुमान है कि एल नीनो के कारण दुनिया भर में लगभग 50 करोड़ लोग गंभीर भुखमरी का सामना कर सकते हैं। दक्षिण अमेरिका में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ फसलों को नष्ट कर सकती है, जबकि अफ्रीका के कई हिस्सों में भीषण सूखा पड़ने की आशंका है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: एल नीनो क्या है?
उत्तर: यह प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाली वृद्धि है, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करती है।
प्रश्न 2: इससे भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
उत्तर: एल नीनो अक्सर मानसून के पैटर्न को प्रभावित करता है, जिससे कभी अत्यधिक सूखा तो कभी बेमौसम भारी बारिश हो सकती है।