नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ, यह समूह अपने 20 साल पूरे कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स को पश्चिम के विरुद्ध एक 'प्रतिद्वंद्वी ब्लॉक' बनने के बजाय वैश्विक आर्थिक सुधारों का नेतृत्व करना चाहिए।
- ब्रिक्स का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (PPP) में हिस्सा G7 से अधिक हो गया है।
- भारत ब्रिक्स को पश्चिम विरोधी ब्लॉक के बजाय एक आर्थिक सुधार मंच के रूप में देखता है।
- ईरान और यूएई जैसे देशों के शामिल होने से समूह के भीतर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है।
नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए तैयार है। यह आयोजन समूह के औपचारिक गठन के 20 वर्ष पूरे होने का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जैसे-जैसे भारत इस शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहा है, वैश्विक विशेषज्ञों के बीच एक बड़ी बहस छिड़ गई है: क्या ब्रिक्स को वास्तव में पश्चिम के प्रभुत्व को चुनौती देनी चाहिए, या इसे वैश्विक दक्षिण (Global South) की आर्थिक आकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए?
आंकड़े बताते हैं कि ब्रिक्स की ताकत अब निर्विवाद है। वर्ष 2000 में, BRIC देशों का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (PPP) केवल 23% था, जबकि G7 का 52% था। हालांकि, 2024 तक स्थिति पूरी तरह बदल गई है। वर्तमान 11 सदस्यीय ब्रिक्स अब वैश्विक GDP का लगभग 36.8% हिस्सा रखता है, जबकि G7 का हिस्सा गिरकर 29% से नीचे आ गया है। ब्रिक्स देशों की विकास दर भी G7 की तुलना में तीन गुना अधिक रहने का अनुमान है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स अब केवल एक आर्थिक चर्चा का मंच नहीं रह गया है, बल्कि एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक शक्ति बन गया है। हालांकि, आर्थिक शक्ति और व्यक्तिगत समृद्धि के बीच एक बड़ा अंतर है। जहाँ G7 का प्रति व्यक्ति GDP लगभग $53,000 है, वहीं ब्रिक्स का औसत केवल $8,200 है। यह अंतर दर्शाता है कि ब्रिक्स की शक्ति उसकी जनसंख्या और संसाधनों में है, न कि व्यक्तिगत संपन्नता में।
ब्रिक्स को पश्चिम के विरुद्ध एक हथियार के रूप में उपयोग करने के बजाय, वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करना चाहिए।
ब्रिक्स के भीतर एक गहरा वैचारिक मतभेद है। चीन और रूस इसे अमेरिकी प्रभुत्व और डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने वाले एक 'प्रति-ब्लॉक' के रूप में देखते हैं। इसके विपरीत, भारत और ब्राजील इसे मुख्य रूप से एक आर्थिक और सुधार-उन्मुख समूह के रूप में देखते हैं। भारत की नीति 'बहु-संरेखण' (Multi-alignment) की है, जहाँ वह ब्रिक्स, G20 और क्वाड (Quad) जैसे समूहों में एक साथ सक्रिय रहता है बिना किसी एक पक्ष का हिस्सा बने।
| पैरामीटर | ब्रिक्स (BRICS) | G7 समूह |
|---|---|---|
| वैश्विक GDP (PPP) | ~36.8% | <29% |
| औसत प्रति व्यक्ति GDP | ~$8,200 | ~$53,000 |
| विकास दर (अनुमानित) | ~3.8% | कमกว่า ब्रिक्स |
समूह का विस्तार भी नई चुनौतियां लाया है। मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई के शामिल होने के बाद, ब्रिक्स के भीतर भू-राजनीतिक विरोधाभास बढ़ गए हैं। मई 2026 में नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान ईरान और यूएई के बीच मतभेदों के कारण एक संयुक्त घोषणा पर सहमति नहीं बन पाई, जो समूह की एकजुटता के लिए एक बड़ी परीक्षा है।
Frequently Asked Questions
1. ब्रिक्स (BRICS) क्या है?
यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जिसमें अब भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, यूएई, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं।
2. भारत ब्रिक्स में क्यों शामिल है?
भारत वैश्विक दक्षिण की आवाज बनने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार लाने के लिए ब्रिक्स का उपयोग करता है, बिना पश्चिम के खिलाफ खड़ा हुए।