नेपाल के नुवाकोट में भीषण बाढ़ के 11 दिनों बाद 64 वर्षीय चंद्रिका श्रेष्ठ को उनके मलबे में दबे घर की चौथी मंजिल से जीवित बचा लिया गया है। यह घटना उस समय हुई जब उनके परिवार ने उनके निधन की अंतिम क्रियाएं शुरू कर दी थीं।
- 64 वर्षीय चंद्रिका श्रेष्ठ को 11 दिनों के बाद मलबे से जीवित निकाला गया।
- उद्धारकर्ता सशस्त्र प्रहरी बल की टीम थी जो मलबे में दबी आवाज सुनकर वहां पहुंची।
- बाढ़ के कारण घर 100 मीटर ऊपर की ओर खिसक गया था, जिससे केवल ऊपरी मंजिल बची थी।
- नेपाल में बाढ़ से अब तक 1,344 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
नेपाल के नुवाकोट जिले में भोटेकोशी नदी बेसिन में आई विनाशकारी बाढ़ के 11 दिनों बाद, एक अविश्वसनीय चमत्कार सामने आया है। 64 वर्षीय चंद्रिका श्रेष्ठ को उनके ढह चुके घर के मलबे से जीवित बचा लिया गया है। यह खबर उन हजारों परिवारों के लिए आशा की एक नई किरण लेकर आई है जो अभी भी अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं।
अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच मिला जीवन का संकेत
रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रिका श्रेष्ठ विदुर नगरपालिका-10 के बेत्रावती की निवासी थीं। 26 अगस्त को जब अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचाई, तो वह अपने चार अन्य रिश्तेदारों के साथ लापता हो गई थीं। त्रासदी इतनी भयानक थी कि उनके परिवार ने हार मान ली थी। आठवें दिन तक, उनके परिजनों ने उनके निधन की आशंका में उनके नाम पर कुश घास से पुतला बनाकर अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर दी थीं।
कैसे हुआ यह चमत्कारिक बचाव?
यह बचाव कार्य तब संभव हुआ जब सशस्त्र प्रहरी बल (Armed Police Force) की एक टीम सड़क निर्माण कार्यों के लिए उस क्षेत्र में तैनात थी। मलबे के पास से आती एक हल्की सी आवाज सुनकर टीम रुकी और उन्होंने हाथों से कीचड़ हटाना शुरू किया। जब उन्होंने एक खिड़की को तोड़ा, तो उन्होंने चंद्रिका को पाया। बाढ़ के तेज बहाव ने उनके घर को लगभग 100 मीटर ऊपर की ओर धकेल दिया था, जिससे घर की तीन और आधा मंजिल पूरी तरह दब गई थी और केवल चौथी मंजिल का कुछ हिस्सा ही बाहर था।
BozokMedia विश्लेषण: आपदा प्रबंधन और मानवीय लचीलापन
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह बचाव केवल भाग्य नहीं, बल्कि स्थानीय सुरक्षा बलों की सतर्कता का परिणाम है। चंद्रिका को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर हेलीकॉप्टर के जरिए त्रिशूली स्थित नेपाल सेना के मैथिली बैरक में ले जाया गया। उन्हें आगे के इलाज के लिए काठमांडू के बिरेन्द्रा अस्पताल भेजा गया है।
मलबे के नीचे जीवित रहने की क्षमता मानवीय इच्छाशक्ति और अचानक आए बचाव प्रयासों के तालमेल का एक प्रमाण है।
हाइड्रोपावर टनल में भी चला बचाव अभियान
चंद्रिका के बचाव के साथ ही, एक अन्य महत्वपूर्ण सफलता रासुवा में मिली। नेपाली सेना और दक्षिण कोरियाई बचाव दल ने अपर त्रिशूली-I हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे एक चीनी नागरिक, लू हैताओ को 225 मीटर गहराई से सुरक्षित बाहर निकाला। उन्होंने अनुवाद सॉफ्टवेयर के माध्यम से बचाव दल से संवाद किया।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: चंद्रिका श्रेष्ठ को कहाँ से बचाया गया?
उत्तर: उन्हें नुवाकोट के बेत्रावती में उनके घर की चौथी मंजिल के मलबे से बचाया गया।
प्रश्न 2: नेपाल में बाढ़ से अब तक कितने लोग लापता हैं?
उत्तर: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 4,900 लोग अभी भी लापता हैं।