नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद, सैकड़ों अज्ञात शवों की पहचान करने के लिए अधिकारी अब डीएनए परीक्षण का सहारा ले रहे हैं। यह प्रक्रिया उन परिवारों के लिए एकमात्र उम्मीद है जो अपने प्रियजनों की तलाश में भटक रहे हैं।
- नेपाल में भीषण बाढ़ के कारण 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 5,000 लोग अभी भी लापता हैं।
- अज्ञात शवों की पहचान के लिए पुलिस ने अब तक 2,272 डीएनए नमूने एकत्र किए हैं।
- शवों की स्थिति खराब होने के कारण चेहरे या कपड़ों से पहचान करना लगभग असंभव हो गया है।
- नेपाल पुलिस ने परिवारों की सुविधा के लिए नुवाकोट के बिदुर में एक डीएनए नमूना संग्रह केंद्र खोला है।
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हिमालयी सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के भूस्खलन से उत्पन्न हुई इस अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों को तहस-नहस कर दिया। भोटेकोषी नदी के प्रचंड वेग ने घरों, वाहनों और पुलों को बहा दिया, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
एक परिवार का दर्द और संघर्ष
अमृत दियाली की कहानी उस त्रासदी का मानवीय चेहरा है जिसे पूरा देश महसूस कर रहा है। उनके भाई राज कुमार, उनकी पत्नी और चार साल के बेटे के लापता होने के बाद, दियाली को नदी के बहाव में एक मानव हाथ मिला है। यह खोज उनके लिए आशा और भय दोनों लेकर आई है। क्या वह हाथ उनके भाई का है? इसका जवाब केवल डीएनए परीक्षण ही दे सकता है।
राज कुमार (33), उनकी पत्नी श्रिति (30) और बेटा सिराज रासुवा जिले के स्याफरुबेसी में रह रहे थे, जब यह आपदा आई। उनके रिश्तेदारों ने चितवन से लेकर नवलपुर तक की खाक छानी, लेकिन अंत में केवल संदेह और अनिश्चितता ही हाथ लगी।
पहचान की चुनौती: क्यों जरूरी है डीएनए?
अधिकारियों के अनुसार, शवों की पहचान करना एक अत्यंत कठिन कार्य बन गया है। लंबे समय तक पानी में रहने, कीचड़ और मलबे के संपर्क में आने के कारण शव बुरी तरह सड़ चुके हैं या उनके अंग अलग-अलग हो चुके हैं। ऐसे में चेहरे, कपड़ों या व्यक्तिगत सामान के आधार पर पहचान करना नामुमकिन है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में 'फ्लैश फ्लड' की आवृत्ति बढ़ रही है, जिससे आपदा प्रबंधन और फोरेंसिक पहचान की आवश्यकताएं पहले से कहीं अधिक जटिल हो गई हैं। डीएनए तकनीक अब केवल वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और अंतिम संस्कार के अधिकार को सुनिश्चित करने का एकमात्र जरिया है।
डीएनए परीक्षण अब केवल एक फोरेंसिक अभ्यास नहीं है, बल्कि उन परिवारों के लिए अनिश्चितता के अंत का एकमात्र रास्ता है जो अपने प्रियजनों की अंतिम विदाई करना चाहते हैं।
नेपाल पुलिस ने अब तक 1,030 शवों को दफनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिनमें से केवल 96 शवों को ही परिवारों को सौंपा जा सका है। पुलिस ने सहायता के लिए काठमांडू के अलावा नुवाकोट में भी केंद्र स्थापित किए हैं ताकि दूरदराज के इलाकों के लोग आसानी से नमूने दे सकें।
Frequently Asked Questions
1. नेपाल में अब तक कितने लोग लापता हैं?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 5,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
2. डीएनए परीक्षण में कितना समय लगता है?
यह एक जटिल प्रक्रिया है और नमूनों की संख्या के आधार पर इसमें काफी समय लग सकता है।