नेपाल सरकार ने हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए नए सुरक्षा दिशा-निर्देश और अनिवार्य मान्यता नियम लागू किए हैं। विदेशी पत्रकारों को अब विशेष प्रेस मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
- बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए नए सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू।
- विदेशी पत्रकारों के लिए अनिवार्य प्रेस मान्यता (Accreditation) प्रक्रिया।
- बौटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में विशेष नियम।
- बचाव कार्यों में बाधा डालने पर प्रतिबंध।
नेपाल सरकार ने हाल ही में देश के उत्तरी और मध्य भागों में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए एक सख्त मीडिया सुरक्षा और परिचालन प्रोटोकॉल जारी किया है। यह निर्णय अगस्त में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन और चट्टानों के गिरने से आई अचानक बाढ़ के बाद लिया गया है, जिसने भारी तबाही मचाई है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, सूचना और संचार मंत्रालय ने इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार के व्यवधान को रोकना है। बौटेकोशी नदी के बहाव के कारण कई गांव, घर और बुनियादी ढांचे पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जिससे रिपोर्टिंग करना अत्यधिक जोखिम भरा हो गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि आपदा के समय मीडिया कवरेज अक्सर बचाव कार्यों में बाधा बन सकता है या पत्रकारों की जान जोखिम में डाल सकता है। नेपाल द्वारा लागू किए गए ये नियम न केवल पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि बचाव दल बिना किसी व्यवधान के अपना काम कर सकें।
आपदा प्रबंधन के दौरान मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना जान बचाने के लिए अनिवार्य है।
नए प्रोटोकॉल के तहत, पत्रकारों को वैध प्रेस पहचान पत्र रखना होगा और सुरक्षा कर्मियों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा। उन्हें केवल निर्धारित मार्गों का उपयोग करने और निकासी आदेशों का पालन करने की अनुमति होगी। सक्रिय बचाव क्षेत्रों में बिना अनुमति प्रवेश करना या बचाव कार्यों में बाधा डालना अब सख्त वर्जित है।
विदेशी पत्रकारों के लिए नए नियम
नेपाल के सूचना और प्रसारण विभाग ने स्पष्ट किया है कि बौटेकोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास रिपोर्टिंग करने वाले विदेशी मीडियाकर्मियों को ऑनलाइन सेवा के माध्यम से 'प्रेस मान्यता' और 'पत्रकार पहचान पत्र' प्राप्त करना होगा। इसके लिए पासपोर्ट, वैध वीजा, मीडिया संगठन का अनुशंसा पत्र और संबंधित दूतावास से सिफारिश पत्र जमा करना आवश्यक है। यह पहचान पत्र केवल 15 दिनों के लिए वैध होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नेपाल की भौगोलिक स्थिति इसे प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील बनाती है। हालिया हिमस्खलन और उसके बाद आई बाढ़ ने 1,300 से अधिक लोगों की जान ले ली है और हजारों लोग लापता हैं। इस तरह की आपदाएं अक्सर हिमालयी क्षेत्रों में जल विज्ञान संबंधी बदलावों और जलवायु परिवर्तन के कारण तीव्र होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या विदेशी पत्रकार बिना अनुमति के बाढ़ क्षेत्र में जा सकते हैं?
नहीं, विदेशी पत्रकारों को अनिवार्य रूप से प्रेस मान्यता प्राप्त करनी होगी और विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र दिखाना होगा।
2. यह नया प्रोटोकॉल कितने समय के लिए प्रभावी है?
यह प्रोटोकॉल तत्काल प्रभाव से लागू है और विदेशी पत्रकारों के लिए जारी पहचान पत्र 15 दिनों के लिए वैध है।