9/11 हमलों की 25वीं वर्षगांठ के साथ, अफगानिस्तान में तालिबान अब अमेरिकी सैन्य उपकरणों के साथ शासन कर रहा है। अमेरिकी करदाताओं द्वारा खरीदे गए $7 बिलियन के हथियार अब तालिबान की ताकत बन चुके हैं।
- तालिबान के पास अमेरिकी सैन्य हार्डवेयर का लगभग $7 बिलियन का भंडार है।
- अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद तालिबान ने अमेरिकी हथियारों और वाहनों पर कब्जा कर लिया।
- डोनाल्ड ट्रंप ने बाइडेन प्रशासन पर निकासी प्रक्रिया में विफल रहने का आरोप लगाया है।
काबुल: 11 सितंबर, 2001 के आतंकवादी हमलों के 25 साल बाद, अफगानिस्तान का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जहाँ एक समय अमेरिकी सेना यहाँ शांति स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रही थी, वहीं आज तालिबान उन्हीं अमेरिकी हथियारों और सैन्य उपकरणों के दम पर सत्ता का आनंद ले रहा है। CBS न्यूज की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी निकासी के बाद तालिबान के पास लगभग $7 बिलियन मूल्य का सैन्य हार्डवेयर आ गया है।
काबुल की सड़कों पर आज भी अमेरिकी दौर के निशान देखे जा सकते हैं। तालिबान के लड़ाके उन बख्तरबंद वाहनों में गश्त करते हैं जो कभी अफगान राष्ट्रीय सेना के लिए अमेरिका द्वारा प्रदान किए गए थे। यहाँ तक कि कुछ वाहनों पर अभी भी पुराने अमेरिकी चिन्ह (decals) देखे जा सकते हैं। यह स्थिति उस 'अनंत युद्ध' (forever war) की एक विडंबनापूर्ण तस्वीर पेश करती है जो दो दशकों तक चला।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल हथियारों की लूट नहीं है, बल्कि यह वैश्विक भू-राजनीति और सैन्य रणनीति की एक बड़ी विफलता का प्रतीक है। अमेरिका द्वारा वित्तपोषित हथियारों का एक कट्टरपंथी समूह के हाथों में जाना न केवल अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह भविष्य के संघर्षों के स्वरूप को भी बदल सकता है।
तालिबान का अमेरिकी हथियारों का प्रदर्शन उनकी सैन्य शक्ति के साथ-साथ अमेरिकी नीति की विफलता का एक सशक्त संदेश है।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी निकासी प्रक्रिया की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने बाइडेन प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्होंने अरबों डॉलर के सैन्य उपकरणों को छोड़ने की अनुमति देकर स्थिति को पूरी तरह बिगाड़ दिया। ट्रंप ने मांग की है कि तालिबान इन संपत्तियों को वापस करे, लेकिन तालिबान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।
तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल काहर बलखी ने स्पष्ट किया कि ये हथियार अब 'अफगानिस्तान के राज्य' की संपत्ति हैं। जब उन्हें याद दिलाया गया कि ये अमेरिकी करदाताओं का पैसा है, तो उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका ने देश में बहुत तबाही मचाई है, इसलिए उन्हें पहले इसका हिसाब देना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2001 में 9/11 हमलों के जवाब में अमेरिका ने अफगानिस्तान में हस्तक्षेप किया था। यह युद्ध दो दशकों से अधिक समय तक चला, जिसमें 2,400 से अधिक अमेरिकी सैनिक और हजारों अफगान नागरिक मारे गए। 2021 में अमेरिकी वापसी के साथ ही तालिबान ने सत्ता पर फिर से कब्जा कर लिया।
| विशेषता | अमेरिकी सेना (2001-2021) | तालिबान (वर्तमान) |
|---|---|---|
| सैन्य शक्ति का स्रोत | अमेरिकी करदाता और नाटो | अमेरिकी सैन्य हार्डवेयर (कब्जा किया हुआ) |
| शासन का स्वरूप | लोकतांत्रिक/प्रायोजित सरकार | कठोर इस्लामी शासन |
Frequently Asked Questions
1. तालिबान के पास कितने अमेरिकी हथियार हैं?
पेंटागन के आंकड़ों के अनुसार, लगभग $7 बिलियन मूल्य का हार्डवेयर तालिबान के नियंत्रण में है।
2. क्या अमेरिका इन हथियारों को वापस ले सकता है?
तालिबान ने स्पष्ट किया है कि वे इन संपत्तियों पर कोई सौदा नहीं करेंगे क्योंकि वे अब अफगानिस्तान की संपत्ति हैं।