इतिहासकार अस्सल राद की नई पुस्तक 'Don’t Say Palestine' यह उजागर करती है कि कैसे मुख्यधारा के मीडिया ने गाजा में इजरायली सैन्य अभियानों को सामान्य बनाने और फिलिस्तीनियों के मानवीकरण को मिटाने में भूमिका निभाई।
- अस्सल राद की नई पुस्तक मीडिया के पक्षपातपूर्ण रवैये का खुलासा करती है।
- मुख्यधारा के मीडिया पर फिलिस्तीनियों के मानवीकरण को मिटाने का आरोप।
- गाजा में चल रहे सैन्य अभियानों को 'व्हाइटवॉशिंग' करने की रणनीति का विश्लेषण।
हाल ही में जारी हुई एक नई पुस्तक, 'Don’t Say Palestine: How the Media Manufactured Consent for Genocide', वैश्विक मीडिया परिदृश्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इतिहासकार और प्रसिद्ध 'हेडलाइन फिक्सर' अस्सल राद (Assal Rad) ने अपनी इस कृति में विस्तार से बताया है कि कैसे बड़े समाचार संस्थानों ने गाजा में इजरायल के सैन्य अभियानों को छिपाने और उन्हें एक स्वीकार्य रूप देने का काम किया।
राद का तर्क है कि मीडिया ने केवल सूचना देने का काम नहीं किया, बल्कि एक ऐसी विमर्श (narrative) तैयार की जिसने फिलिस्तीनियों के प्रति घृणा और उनके मानवीकरण को समाप्त करने की प्रक्रिया को सामान्य बना दिया। यह प्रक्रिया 'सहमति निर्माण' (manufacturing consent) का एक उत्कृष्ट और भयावह उदाहरण है, जहाँ मीडिया द्वारा चुनिंदा शब्दों और सूचनाओं के अभाव के माध्यम से युद्ध को वैध ठहराया जाता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि जब मीडिया निष्पक्षता का त्याग कर किसी विशेष राजनीतिक एजेंडे के साथ खड़ा हो जाता है, तो वह केवल सूचना का स्रोत नहीं रह जाता, बल्कि जनसंहार के लिए मनोवैज्ञानिक आधार तैयार करने वाला एक उपकरण बन जाता है। यह वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए एक बड़ा खतरा है।
मीडिया की चुप्पी और शब्दों का गलत चयन अक्सर युद्ध अपराधों को मौन स्वीकृति प्रदान करने के बराबर होता है।
इस चर्चा के दौरान, अल जजीरा के प्रस्तुतकर्ता रिचर्ड गिजबर्ट ने मीडिया के उन 'पत्रकारिता संबंधी पापों' पर प्रकाश डाला, जिन्हें राद ने अपनी पुस्तक में सुधारा है। यह केवल गाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है जहाँ शक्तिशाली राष्ट्रों के नैरेटिव को बिना किसी चुनौती के प्रसारित किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, वेस्ट बैंक की स्थिति पर भी गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। पत्रकार अमीद शेहादे (Ameed Shehade) ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे इजरायली सेना की सुरक्षा में बसने वाले लोग (settlers) फिलिस्तीनियों पर हमले कर रहे हैं। शेहादे के अनुसार, उनके लिए पत्रकारिता करना मौत के साये में जीने जैसा है, जहाँ वे खुद एक निशाने पर होते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मीडिया द्वारा 'सहमति निर्माण' का सिद्धांत नोम चोमस्की द्वारा लोकप्रिय बनाया गया था, जो बताता है कि कैसे मीडिया और सरकारें मिलकर जनता को उन नीतियों के लिए तैयार करती हैं जो वास्तव में उनके हितों के विरुद्ध हो सकती हैं।
Frequently Asked Questions
1. अस्सल राद की पुस्तक का मुख्य विषय क्या है?
इस पुस्तक का मुख्य विषय यह है कि कैसे मीडिया ने गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई को वैध बनाने के लिए फिलिस्तीनियों के प्रति मानवीय संवेदनाओं को कम किया।
2. 'व्हाइटवॉशिंग' से क्या तात्पर्य है?
मीडिया के संदर्भ में, व्हाइटवॉशिंग का अर्थ है किसी हिंसक या अनैतिक घटना को सूचनाओं के हेरफेर के माध्यम से साफ-सुथरा और स्वीकार्य दिखाना।