तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बाद लापता 49 भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय दूतावास ने डीएनए नमूने मांगे हैं। परिवारों को अंतरराष्ट्रीय CODIS प्रारूप में रक्त के नमूने जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई बाढ़ के बाद 49 भारतीय लापता हैं।
  • चीनी अधिकारियों ने CODIS-आधारित डीएनए मिलान की अनुमति दी है।
  • परिवारों को माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चों से रक्त के नमूने देने होंगे।
  • डाटा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त CODIS प्रारूप में होना चाहिए।

तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के बाद, चीन में स्थित भारतीय दूतावास ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दूतावास ने लापता 49 भारतीय नागरिकों की पहचान करने के उद्देश्य से उनके परिवारों से डीएनए (DNA) नमूने जमा करने का अनुरोध किया है। यह निर्णय चीनी अधिकारियों द्वारा यह पुष्टि करने के बाद लिया गया है कि अब वे लापता भारतीयों की पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त CODIS-आधारित मिलान प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं।

भारतीय मिशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जो परिवार डीएनए जानकारी साझा करने के इच्छुक हैं, उन्हें संबंधित डेटा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त CODIS प्रारूप में प्रस्तुत करना होगा। एक बार डेटा प्राप्त होने के बाद, इसे तुलना के लिए संबंधित चीनी अधिकारियों को भेज दिया जाएगा। यदि मिलान की पुष्टि हो जाती है, तो दूतावास सीधे परिवार को सूचित करेगा।

नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया

दूतावास ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि रक्त के नमूने लापता व्यक्ति के माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चों से एकत्र किए जा सकते हैं। जहां संभव हो, कई बच्चों के नमूने लेने की सलाह दी गई है ताकि सटीकता सुनिश्चित हो सके। यदि लापता व्यक्ति के जीवित माता-पिता या बच्चे नहीं हैं, तो भाई-बहनों (सभी भाई-बहनों के नमूने लेना प्राथमिकता है) से नमूने लिए जा सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर, चचेरे भाई-बहनों (कजिन्स) जैसे अन्य मातृ या पितृ रिश्तेदारों से भी नमूने लिए जा सकते हैं, बशर्ते रिश्ते का विवरण स्पष्ट हो।

तकनीकी रूप से, नमूनों के लिए DNA STR डेटा की आवश्यकता है और पुरुषों के मामले में Y-STR डेटा भी अनिवार्य है। प्रत्येक नमूने पर लापता व्यक्ति का नाम, राष्ट्रीयता, पासपोर्ट नंबर और परिवार के सदस्य का विवरण स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह आपदा न केवल एक प्राकृतिक त्रासदी है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जटिलताओं को भी उजागर करती है। 49 भारतीयों की पहचान के लिए यह डीएनए प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि यह परिवारों को उनके प्रियजनों के बारे में अंतिम उत्तर दे सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त CODIS प्रारूप का उपयोग करना इस कठिन समय में पहचान की संभावनाओं को अधिकतम करने के लिए एकमात्र वैज्ञानिक तरीका है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक हिम-चट्टान भूस्खलन (ice-rock avalanche) के कारण शुरू हुई थी। इससे भोटेकोषी नदी में पानी और मलबे का एक विशाल प्रवाह आया, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल की बस्तियों को तहस-नहस कर दिया। चीनी अधिकारियों ने मृत्यु दर को संशोधित करते हुए 43 की पुष्टि की है, जबकि 519 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

Did You Know?: CODIS (Combined DNA Index System) एक व्यापक डेटाबेस है जिसका उपयोग कानून प्रवर्तन और आपदा प्रबंधन में पहचान के लिए किया जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: नमूने जमा करने के लिए संपर्क कैसे करें?
उत्तर: परिवार दूतावास को +86 18514284905 पर कॉल कर सकते हैं या [email protected] पर ईमेल कर सकते हैं।

प्रश्न 2: किन रिश्तेदारों के नमूने स्वीकार्य हैं?
उत्तर: माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चे, भाई-बहन और आवश्यकतानुसार चचेरे भाई-बहन।