यूरोपीय अधिकारियों ने ऑनलाइन युवा नेटवर्क द्वारा संचालित 'निहिलिस्टिक' (शून्यवादी) हिंसक उग्रवाद की नई लहर के प्रति चेतावनी जारी की है। यह प्रवृत्ति किसी राजनीतिक विचारधारा के बजाय केवल प्रसिद्धि और हिंसा के लिए हमलों को बढ़ावा दे रही है।
- 'निहिलिस्टिक हिंसक उग्रवाद' का उदय, जहाँ हिंसा विचारधारा के लिए नहीं, बल्कि केवल हिंसा के लिए की जा रही है।
- 'The COM' और '764' जैसे एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन नेटवर्क युवाओं को ऑफलाइन हमलों के लिए उकसा रहे हैं।
- AI, डीपफेक और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन खतरों का पता लगाना कठिन हो गया है।
अमेरिका पर अल-कायदा हमलों के 25 साल बाद, यूरोप अब एक नए और अधिक अप्रत्याशित सुरक्षा खतरे का सामना कर रहा है। जहाँ जिहादी खतरे अभी भी मौजूद हैं, वहीं यूरोपीय संघ के आतंकवाद विरोधी समन्वयक बार्टजन वेग्टर ने युवाओं द्वारा संचालित 'निहिलिस्टिक' (शून्यवादी) हिंसक उग्रवाद के प्रति गंभीर चिंता जताई है। इस प्रवृत्ति की सबसे डरावनी बात यह है कि इसमें हिंसा का कोई राजनीतिक या धार्मिक उद्देश्य नहीं होता, बल्कि हिंसा को ही एक उपलब्धि माना जाता है।
नौ यूरोपीय देशों की पुलिस जांच में "The COM" नामक एक ऑनलाइन समुदाय का पता चला है, जिससे जुड़े लगभग 4,340 URL पते मिले हैं। यह नेटवर्क एक डिजिटल नर्सरी की तरह काम कर रहा है, जहाँ 18 वर्ष से कम उम्र के लड़के एन्क्रिप्टेड चैट के माध्यम से हिंसक सामग्री साझा करते हैं ताकि वे अपने समूह में 'स्टेटस' हासिल कर सकें। चूंकि इन युवाओं का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होता, इसलिए खुफिया एजेंसियों के लिए इन्हें ट्रैक करना लगभग असंभव हो गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि विचारधारा-आधारित आतंकवाद से हटकर 'निहिलिस्टिक' हिंसा की ओर बढ़ना सुरक्षा ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती है। जब हिंसा का उद्देश्य केवल 'रोमांच' या 'प्रसिद्धि' हो, तो पारंपरिक डी-रैडिकलाइजेशन (कट्टरपंथ विरोधी) कार्यक्रम विफल हो जाते हैं, क्योंकि यहाँ कोई ऐसी विचारधारा नहीं होती जिसे तर्क या संवाद से बदला जा सके।
इसके वास्तविक परिणाम बेहद भयानक रहे हैं। फिनलैंड में, एक 16 वर्षीय लड़के ने छात्राओं पर चाकू से हमला किया और इस पूरी घटना को स्नैपचैट पर रिकॉर्ड किया। वहीं इटली में, एक 15 वर्षीय लड़के ने केवल ऑनलाइन प्रसिद्धि पाने के लिए हत्या की योजना बनाई। ये मामले दर्शाते हैं कि डिजिटल दुनिया में 'लाइक' और 'व्यूज' की भूख अब वास्तविक जीवन में खून-खराबे का कारण बन रही है।
"ऑनलाइन वातावरण विभिन्न खतरों के बीच संबंध बनाने के लिए एक पेट्री डिश (उत्प्रेरक) की तरह काम कर रहा है, जो नागरिकों की सुरक्षा के लिए बहुत अधिक खुला और खतरनाक है।" - बार्टजन वेग्टर
इसके अलावा, '764' जैसे समूहों की सक्रियता ने चिंता बढ़ा दी है, जिसकी स्थापना ब्रैडली कैडेनहेड ने की थी। यह समूह न केवल हिंसा, बल्कि बाल शोषण और अमानवीय अत्याचारों में भी लिप्त है। ये समूह डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग का उपयोग करते हैं ताकि वे कानून की नजरों से बच सकें और नए सदस्यों को भर्ती कर सकें।
तकनीकी प्रगति ने इस खतरे को और अधिक घातक बना दिया है। यूरोपोल के अनुसार, अपराधी अब भर्ती के लिए AI-पावर्ड बॉट्स, दुष्प्रचार के लिए डीपफेक और हमलों की योजना बनाने के लिए AI-संचालित ऐप्स का उपयोग कर रहे हैं। वर्तमान में 85% जांच डिजिटल वातावरण में हो रही है, जिससे EU अब अधिक उन्नत निगरानी उपकरणों की मांग कर रहा है, हालांकि निजता के पैरोकार इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बता रहे हैं।
| विशेषता | पारंपरिक जिहादी आतंकवाद | निहिलिस्टिक युवा उग्रवाद |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | धार्मिक/राजनीतिक विचारधारा | प्रसिद्धि, स्टेटस, रोमांच |
| संगठन | पदानुक्रमित/सेल-आधारित | विकेंद्रीकृत ऑनलाइन नेटवर्क |
| पहचान | खुफिया जानकारी/मुखबिर | कठिन (एन्क्रिप्टेड/कोई रिकॉर्ड नहीं) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'निहिलिस्टिक हिंसक उग्रवाद' क्या है?
यह हिंसा का वह रूप है जो किसी राजनीतिक या धार्मिक लक्ष्य के बजाय केवल ऑनलाइन प्रसिद्धि या व्यक्तिगत संतुष्टि की इच्छा से प्रेरित होता है।
प्रश्न 2: ये समूह AI का उपयोग कैसे कर रहे हैं?
AI का उपयोग डीपफेक प्रोपेगेंडा बनाने, बॉट्स के जरिए भर्ती करने और हमलों की तकनीकी योजना तैयार करने के लिए किया जा रहा है।