हंगरी ने सुरक्षा कारणों से 10 रूसी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया है, जिसके बाद रूस ने 'कठोर और दर्दनाक' जवाबी कार्रवाई का वादा किया है। यह कदम यूरोपीय संघ के भीतर रूस के प्रति हंगरी के बदलते रुख को दर्शाता है।

  • हंगरी ने 'अस्वीकार्य गतिविधियों' के कारण 10 रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया।
  • रूस ने इस कदम को अपमानजनक बताते हुए 'कठोर और दर्दनाक' प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।
  • यह निर्णय हंगरी की नई सरकार के तहत रूस के साथ संबंधों में बड़े बदलाव का संकेत है।

हंगरी की सरकार ने एक नाटकीय मोड़ लेते हुए 10 रूसी राजनयिकों को तत्काल प्रभाव से देश छोड़ने का आदेश दिया है। हंगरी के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अनीता ओर्बन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि ये राजनयिक ऐसी "अस्वीकार्य" गतिविधियों में शामिल थे जो उनके राजनयिक दर्जे के साथ मेल नहीं खाते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह निर्णय हंगरी की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए लिया गया है।

हालांकि, अनीता ओर्बन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम का अर्थ रूस के साथ राजनयिक संबंधों को पूरी तरह से तोड़ना नहीं है। यह संतुलन बनाने की कोशिश है, जहाँ एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है, वहीं दूसरी ओर पूरी तरह से अलगाव से बचा जा रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना हंगरी की आंतरिक राजनीति में आए बड़े बदलाव का परिणाम है। पिछले 16 वर्षों तक विक्टर ओर्बन के शासनकाल में हंगरी, यूरोपीय संघ के भीतर रूस के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक था। पिछले साल विक्टर ओर्बन द्वारा पुतिन से कहे गए शब्द "मैं आपकी सेवा में हूँ", हंगरी के पुराने झुकाव को दर्शाते थे। लेकिन अप्रैल में हुए चुनावों के बाद नई सरकार का यह कदम यह संकेत देता है कि अब बुडापेस्ट अपनी विदेश नीति को यूरोपीय संघ की मुख्यधारा के साथ जोड़ रहा है।

"हंगरी का यह कदम यूरोपीय संघ के भीतर रूस के अंतिम गढ़ के ढहने जैसा है, जो ब्रुसेल्स के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है।"

रूस की प्रतिक्रिया तत्काल और आक्रामक रही है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने TASS समाचार एजेंसी को बताया कि मॉस्को इस कार्रवाई का "कठोर और दर्दनाक" जवाब देगा। रूस ने इसे एक शत्रुतापूर्ण कदम माना है, जो पिछले कुछ वर्षों के द्विपक्षीय संबंधों के विपरीत है।

यूरोपीय संघ (EU) ने इस निर्णय का समर्थन किया है। यूरोपीय संघ के प्रवक्ता क्रिश्चियन विगैंड ने इसे एक "वैध निर्णय" करार दिया और कहा कि संघ इस स्थिति पर बारीकी से समन्वय करना जारी रखेगा। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद अधिकांश यूरोपीय देशों ने अपने यहाँ से रूसी राजनयिकों को निकाल दिया था, लेकिन हंगरी अब तक इस सूची से बाहर था।

क्या आप जानते हैं?: हंगरी और रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से जटिल रहे हैं, लेकिन पिछले दशक में ऊर्जा समझौतों के कारण बुडापेस्ट और मॉस्को के बीच निकटता काफी बढ़ गई थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: हंगरी ने रूसी राजनयिकों को क्यों निकाला?
उत्तर: हंगरी सरकार ने आरोप लगाया कि ये राजनयिक ऐसी गतिविधियों में शामिल थे जो उनके राजनयिक दर्जे के विपरीत और हंगरी की सुरक्षा के लिए खतरा थीं।

प्रश्न 2: क्या हंगरी ने रूस के साथ संबंध पूरी तरह खत्म कर लिए हैं?
उत्तर: नहीं, विदेश मंत्री अनीता ओर्बन ने स्पष्ट किया है कि राजनयिकों को निकालने का मतलब संबंधों को पूरी तरह तोड़ना नहीं है।