एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को 2023 के हमास हमले के बारे में पहले ही चेतावनी दी गई थी, जिसे उन्होंने कथित तौर पर नजरअंदाज किया। पीएम कार्यालय ने इन दावों को 'पूर्ण झूठ' करार दिया है।

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कथित तौर पर नेतन्याहू को संभावित हमले के प्रति आगाह किया था।
  • चेतावनी में क्षेत्रीय अस्थिरता और अब्राहम समझौते (Abraham Accords) के खतरे का जिक्र था।
  • इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन आरोपों का कड़ा खंडन किया है।

हाल ही में सामने आई एक विवादास्पद रिपोर्ट ने इजरायल के राजनीतिक गलियारों में तूफान खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट का दावा है कि 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा किए गए भीषण हमले से पहले, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को स्पष्ट चेतावनी दी गई थी। आरोप है कि इन खुफिया जानकारियों को साझा करने के बजाय, नेतन्याहू ने इन्हें गुप्त रखा, जिससे सुरक्षा एजेंसियां समय रहते तैयारी नहीं कर पाईं।

रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शासक और नेतन्याहू के बीच एक 45 मिनट लंबी फोन कॉल हुई थी। इस बातचीत के दौरान, अमीराती शासक ने नेतन्याहू से इस खतरे को गंभीरता से लेने का आग्रह किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि ऐसा कोई भी हमला न केवल भारी रक्तपात का कारण बनेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है।

इस चेतावनी का एक बड़ा पहलू अब्राहम समझौते (Abraham Accords) से जुड़ा था। यह समझौता इजरायल और कई अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने के लिए किया गया था। चेतावनी में कहा गया था कि हमास का कोई भी बड़ा हमला इन नाजुक कूटनीतिक संबंधों को बुनियादी तौर पर कमजोर कर सकता है और शांति प्रयासों को दशकों पीछे धकेल सकता है।

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल खुफिया विफलता का नहीं है, बल्कि यह नेतन्याहू की राजनीतिक विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रहार है। यदि यह साबित हो जाता है कि चेतावनी को जानबूझकर दबाया गया था, तो इजरायल के भीतर उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और बढ़ सकते हैं। यह घटना दिखाती है कि कैसे व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारी पड़ सकती हैं।

खुफिया जानकारी का समय पर साझा न होना युद्ध के परिणामों को घातक बना देता है, खासकर जब चेतावनी अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से आई हो।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस पूरी रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। आधिकारिक बयान में इसे एक "पूर्ण झूठ" (Absolute Lie) बताया गया है। पीएमओ का तर्क है कि सुरक्षा तंत्र ने अपनी क्षमता के अनुसार काम किया और इस तरह की किसी भी विशिष्ट चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया गया।

ऐतिहासिक रूप से, इजरायल का खुफिया तंत्र (Mossad और Shin Bet) दुनिया के सबसे सटीक तंत्रों में गिना जाता है। हालांकि, 7 अक्टूबर की विफलता ने इस धारणा को तोड़ दिया है। अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह विफलता तकनीकी थी या राजनीतिक।

क्या आप जानते हैं?: अब्राहम समझौते 2020 में हस्ताक्षरित हुए थे, जिसने इजरायल और यूएई सहित कई अरब राष्ट्रों के बीच ऐतिहासिक राजनयिक संबंध स्थापित किए थे।

प्रश्न 1: रिपोर्ट के अनुसार चेतावनी किसने दी थी?
उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शासक ने बेंजामिन नेतन्याहू को चेतावनी दी थी।

प्रश्न 2: इजरायली सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
उत्तर: प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन दावों को पूरी तरह से गलत और 'पूर्ण झूठ' बताया है।