एक सनसनीखेज रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति ने 7 अक्टूबर के हमले से 10 दिन पहले इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को चेतावनी दी थी। हालांकि, इजरायल ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, लेकिन इससे नेतन्याहू सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

  • दावा है कि यूएई के राष्ट्रपति ने 7 अक्टूबर से 10 दिन पहले नेतन्याहू को हमास हमले की चेतावनी दी थी।
  • इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन दावों को "पूरी तरह से झूठा और मनगढ़ंत" बताया है।
  • इस नए खुलासे के बाद इजरायल के भीतर नेतन्याहू के खिलाफ राजनीतिक विरोध तेज हो गया है।

7 अक्टूबर को हमास द्वारा किए गए विनाशकारी हमले ने इजरायल को झकझोर कर रख दिया था, जिसके बाद से मध्य पूर्व में भीषण युद्ध जारी है। लेकिन अब एक नया और विस्फोटक दावा सामने आया है, जिसने इजरायली राजनीति में भूचाल ला दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) ने हमले से ठीक 10 दिन पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे तौर पर सचेत किया था कि हमास एक बड़ा हमला करने की योजना बना रहा है।

यह दावा इजरायली मीडिया, विशेष रूप से हारेत्ज़ (Haaretz) की रिपोर्ट और हाल ही में प्रकाशित एक पुस्तक में किया गया है। पुस्तक के अनुसार, यूएई के नेता ने नेतन्याहू से संपर्क कर खुफिया जानकारी साझा की थी और चेतावनी दी थी कि गाजा सीमा पर अप्रत्याशित सुरक्षा उल्लंघन हो सकता है। इस खुलासे ने नेतन्याहू की सुरक्षा रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन आरोपों का कड़ा विरोध किया है। एक आधिकारिक बयान में, यरुशलम ने इन रिपोर्टों को "पूरी तरह से बकवास" और "निराधार" करार दिया। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि यूएई और इजरायल के बीच खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान केवल स्थापित और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से होता है, और नेतन्याहू को सीधे तौर पर ऐसी कोई चेतावनी नहीं दी गई थी।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि ये आरोप बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा हैं। दशकों से खुद को "मिस्टर सिक्योरिटी" के रूप में पेश करने वाले नेतन्याहू के लिए यह रिपोर्ट बेहद नुकसानदेह है। अगर यह साबित हो जाता है कि अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने वाले यूएई जैसे क्षेत्रीय सहयोगी ने ठोस चेतावनी दी थी और उसे नजरअंदाज किया गया, तो नेतन्याहू का बचा-खुचा राजनीतिक गठबंधन भी बिखर सकता है।

"अगर यह दावा सच साबित होता है, तो यह 7 अक्टूबर की विफलता की पूरी कहानी को बदल देगा। इसके बाद सैन्य विफलता के बजाय सीधे तौर पर देश के शीर्ष नेतृत्व की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।"

इस मुद्दे की पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक है। यूएई और इजरायल ने साल 2020 में ऐतिहासिक अब्राहम समझौते (Abraham Accords) के माध्यम से अपने संबंधों को सामान्य किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सुरक्षा और खुफिया सहयोग काफी मजबूत हो गया था। यही कारण है कि विश्लेषक इस चेतावनी की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं कर पा रहे हैं।

पहलूआरोप (रिपोर्ट/पुस्तक)इजरायल का आधिकारिक खंडन
चेतावनी का स्रोतयूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद (MBZ)कोई चेतावनी नहीं; दावों को "मनगढ़ंत" बताया
समय सीमा7 अक्टूबर के हमले से 10 दिन पहलेकिसी भी स्तर पर ऐसी कोई सूचना नहीं मिली
संचार का माध्यमनेताओं के बीच सीधा संपर्कखुफिया जानकारी केवल आधिकारिक चैनलों से साझा होती है

इजरायल के भीतर पहले से ही बंधकों के परिवारों और विपक्षी नेताओं द्वारा 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। इस नए दावे ने आग में घी का काम किया है। विपक्षी दलों ने मांग की है कि प्रधानमंत्री को तुरंत स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें क्या जानकारी थी और उन्होंने इस पर क्या कार्रवाई की।

Did You Know?: साल 2020 में हस्ताक्षरित अब्राहम समझौता, पिछले 25 से अधिक वर्षों में इजरायल और किसी अरब देश के बीच पहला शांति समझौता था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यूएई ने आधिकारिक तौर पर इस चेतावनी की पुष्टि की है?
उत्तर 1: नहीं, यूएई सरकार ने इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, क्योंकि वे खुफिया मामलों को अत्यंत गोपनीय रखते हैं।

प्रश्न 2: इस मुद्दे पर नेतन्याहू का मुख्य बचाव क्या है?
उत्तर 2: नेतन्याहू के कार्यालय का कहना है कि सभी सुरक्षा चेतावनियां औपचारिक खुफिया चैनलों के माध्यम से आती हैं, और यूएई के नेता द्वारा ऐसी कोई सीधी चेतावनी नहीं दी गई थी।