क्लस्टर म्यूनिशन कोएलिशन की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में क्लस्टर बमों के कारण दुनिया भर में कम से कम 1,063 लोग मारे गए या घायल हुए हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या निर्दोष नागरिकों की है, जिसमें अकेले यूक्रेन की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत है।
- साल 2025 में क्लस्टर बमों के कारण वैश्विक स्तर पर 1,063 लोग हताहत हुए, जो इतिहास के सबसे बड़े आंकड़ों में से एक है।
- यूक्रेन इस तबाही का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है, जहां दुनिया भर के कुल मामलों के 87% दर्ज किए गए हैं।
- अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों ने इस प्रतिबंधात्मक संधि को बढ़ावा देने वाले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के खिलाफ पहली बार मतदान किया।
दुनिया भर में प्रतिबंधित हथियारों के इस्तेमाल को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। शोधकर्ताओं के एक वैश्विक नेटवर्क द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में क्लस्टर म्यूनिशन (क्लस्टर बमों) के कारण कम से कम 1,063 लोग मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह आंकड़ा इतिहास में दर्ज सबसे अधिक वार्षिक हताहतों की संख्या में से एक है, जो युद्ध क्षेत्रों में आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्लस्टर म्यूनिशन कोएलिशन (CMC) की वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि इन हमलों में हताहत होने वाले अधिकांश लोग आम नागरिक थे, जिनमें कम से कम 34 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये मौतें और चोटें अफगानिस्तान, कंबोडिया, इराक, लाओस, लेबनान, म्यांमार, रूस, सीरिया और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त देशों में दर्ज की गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई दूरदराज के क्षेत्रों से हताहतों की रिपोर्ट दर्ज ही नहीं हो पाती है।
यूक्रेन लगातार चौथे वर्ष इन घातक हथियारों से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला देश रहा है। साल 2025 में वैश्विक स्तर पर दर्ज कुल हताहतों में से 87 प्रतिशत मामले अकेले यूक्रेन से सामने आए हैं। इससे पहले, साल 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद, क्लस्टर बमों से हताहत होने वालों की संख्या अपने ऐतिहासिक शिखर (1,172) पर पहुंच गई थी।
यह क्यों मायने रखता है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि क्लस्टर हथियारों के बढ़ते उपयोग और अंतरराष्ट्रीय संधियों की अनदेखी वैश्विक सुरक्षा ढांचे के लिए एक बड़ा खतरा है। जब वैश्विक महाशक्तियां ही इन हथियारों के नियंत्रण से पीछे हटने लगती हैं, तो युद्ध के नियम कमजोर पड़ जाते हैं और अंततः इसका खामियाजा निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ता है।
"वैश्विक महाशक्तियों द्वारा क्लस्टर हथियारों का निरंतर उपयोग और उत्पादन दशकों की मानवीय प्रगति को कमजोर करता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक घातक विरासत बचती है।"
क्लस्टर बमों की सबसे खतरनाक बात यह है कि वे हवा में ही फटकर दर्जनों छोटे-छोटे बम (सबम्यूनिशन) बिखेर देते हैं। ये छोटे बम बिना किसी भेदभाव के बड़े इलाके को तबाह करते हैं। इनमें से कई बम हमले के समय नहीं फटते और सालों तक जमीन में दबे रहते हैं, जो बाद में बारूदी सुरंगों की तरह काम करते हैं और बच्चों व किसानों को अपना शिकार बनाते हैं।
साल 2010 में लागू हुई 'कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन' संधि के तहत इन हथियारों के उपयोग, उत्पादन और भंडारण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस संधि में 112 देश शामिल हैं, जबकि 12 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, मार्च में लिथुआनिया इस संधि से हटने वाला पहला देश बन गया, जिसने अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को एक बड़ा झटका दिया है।
| विशेषता / वर्ष | 2022 (ऐतिहासिक शिखर) | 2025 (नवीनतम रिपोर्ट) |
|---|---|---|
| कुल वैश्विक हताहत | 1,172 | 1,063 |
| सबसे प्रभावित देश | यूक्रेन | यूक्रेन (87% हिस्सेदारी) |
| प्रमुख संधि परिवर्तन | संधि मजबूत थी | लिथुआनिया संधि से बाहर हुआ |
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन, भारत, इजरायल, म्यांमार, उत्तर कोरिया, पोलैंड, रोमानिया, रूस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में इन हथियारों के नए उत्पादन के सबूत मिले हैं। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा भविष्य में क्लस्टर हथियारों के नए उत्पादन की योजना बनाने के संकेत भी मिले हैं। पिछले साल अमेरिकी विदेशी सहायता में की गई कटौती के कारण पुराने क्लस्टर बमों को हटाने का काम बाधित हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 2025 में कम से कम 117 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी या वे घायल हो गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्लस्टर म्यूनिशन पर कन्वेंशन (संधि) क्या है?
यह 2010 में लागू हुई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो क्लस्टर बमों के उपयोग, उत्पादन, हस्तांतरण और भंडारण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाती है।
2. क्लस्टर बम नागरिकों के लिए इतने खतरनाक क्यों हैं?
ये बम हवा में फटकर सैकड़ों छोटे बम बिखेरते हैं, जिनमें से कई तुरंत नहीं फटते। ये बिना फटे बम सालों तक जमीन में छिपे रहते हैं और बाद में निर्दोष नागरिकों की मौत का कारण बनते हैं।