दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकल ने भारत की वैश्विक स्थिति की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ दोनों के बीच एक विश्वसनीय सेतु बन गया है। उन्होंने BRICS शिखर सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक शासन सुधारों और खाद्य सुरक्षा पर जोर दिया।

  • भारत अब ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ दोनों के बीच समान रूप से स्वीकार्य राष्ट्र बन गया है।
  • BRICS देशों का मुख्य लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और समावेशी शासन है।
  • खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा वर्तमान में ग्लोबल साउथ के लिए सबसे गंभीर चुनौतियां हैं।
  • प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच का विश्वास युद्ध समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले, भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकल ने एक विस्तृत साक्षात्कार में वैश्विक राजनीति और भारत की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। सूकल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान संघर्ष-ग्रस्त दुनिया में BRICS केवल एक आर्थिक समूह नहीं, बल्कि नेतृत्व प्रदान करने वाला एक मंच बन गया है।

उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि वैश्विक समुदाय का 85 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद, ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आवाज को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। सूकल के अनुसार, दुनिया वर्तमान में अलग-अलग खेमों में बंट रही है, जहां शक्तिशाली देश छोटे देशों पर अपनी इच्छा थोप रहे हैं। ऐसे में BRICS की भूमिका एक न्यायसंगत और समावेशी वैश्विक समुदाय के निर्माण में महत्वपूर्ण हो जाती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) ने उसे एक ऐसी स्थिति में खड़ा कर दिया है जहाँ वह पश्चिम (Global North) और पूर्व/दक्षिण (Global South) के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। यह न केवल भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाता है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और सुरक्षा ढांचे में भारत के प्रभाव को भी पुख्ता करता है।

उच्चायुक्त ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 'पंगु' होने पर प्रहार करते हुए कहा कि यह एक त्रासदी है कि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप और लैटिन अमेरिका की वहां कोई प्रभावी आवाज नहीं है। उन्होंने भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की स्थायी सदस्यता की मांग का पुरजोर समर्थन किया।

"भारत के पास एक 'ट्रस्ट फैक्टर' है; दुनिया जानती है कि भारत का कोई छिपा हुआ एजेंडा नहीं है, और यही कारण है कि वह ग्लोबल नॉर्थ और साउथ दोनों के बीच पुल का काम कर पा रहा है।"

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर बात करते हुए सूकल ने बताया कि उर्वरकों की कमी और युद्धों के कारण खाद्य कीमतें बढ़ी हैं, जिससे निम्न-आय वाले देशों के किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत की अध्यक्षता में BRICS इन चुनौतियों पर ठोस समाधान निकालेगा।

भारत और चीन के संबंधों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सदी के अंत तक ये दोनों दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं होंगी। उनके बीच सह-अस्तित्व अनिवार्य है, जैसा कि पिछले 2,000 वर्षों तक रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को उन्होंने एक सकारात्मक संकेत माना।

क्या आप जानते हैं?: BRICS समूह की स्थापना का उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच देना था, और अब यह वैश्विक जीडीपी के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ग्लोबल साउथ के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: क्योंकि यह विकासशील देशों को वैश्विक शासन संरचनाओं में अपनी आवाज उठाने और शक्तिशाली देशों के प्रभाव को संतुलित करने का मौका देता है।

प्रश्न 2: भारत की वैश्विक स्वीकार्यता का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: भारत की निष्पक्षता, विभिन्न विचारधाराओं के बीच संवाद करने की क्षमता और प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक नेताओं के साथ व्यक्तिगत विश्वास।