दक्षिण सुमात्रा में जंगल की आग से उत्पन्न जहरीले धुएं के कारण 2.5 लाख से अधिक छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई पर शिफ्ट किया गया है। एल नीनो के प्रभाव से बढ़ी इस आपदा ने दक्षिण-पूर्व एशिया में स्वास्थ्य आपातकाल पैदा कर दिया है।

  • देश भर में 14 लाख से अधिक छात्र जहरीले धुएं के कारण स्कूल बंद होने से प्रभावित हुए हैं।
  • दक्षिण सुमात्रा के पालेमबांग में 1,030 स्कूलों के 2.5 लाख छात्रों के लिए रिमोट लर्निंग अनिवार्य की गई।
  • एल नीनो और लंबे सूखे ने पीटलैंड (peatland) की आग को और भड़काया है, जिसमें मध्य कालीमंतन सबसे हॉटस्पॉट है।
  • अमेरिका, रूस, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने अग्निशमन विमान भेजकर मदद की है।

इंडोनेशिया के दक्षिण सुमात्रा प्रांत में जंगल और पीटलैंड की आग से निकलने वाले जहरीले धुएं ने वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके परिणामस्वरूप, प्रशासन ने बुधवार से स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। पालेमबांग के मेयर रतु देवा ने बताया कि इस आपातकालीन कदम के तहत किंडरगार्टन से लेकर जूनियर हाई तक के 1,030 स्कूलों के 2,50,000 से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं।

यह संकट केवल एक शहर तक सीमित नहीं है। सेव द चिल्ड्रन (Save the Children) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल एल नीनो के प्रभाव और भीषण सूखे के कारण देश भर में 14 लाख से अधिक छात्रों की शिक्षा बाधित हुई है। यह जहरीला धुआं अब इंडोनेशिया की सीमाओं को पार कर फिलीपींस और मलेशिया तक पहुंच गया है, जिससे पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक मौसमी समस्या नहीं है, बल्कि जलवायु लचीलेपन (climate resilience) की विफलता है। जब धुआं 800 किलोमीटर दूर फिलीपींस तक पहुंच जाता है, तो यह स्पष्ट होता है कि इंडोनेशिया का भूमि प्रबंधन एक क्षेत्रीय भू-राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। जलवायु परिवर्तन और पीटलैंड का क्षरण मिलकर एक ऐसा 'विषाक्त चक्र' बना रहे हैं जो आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के मौलिक अधिकार को खतरे में डाल रहा है।

"यह केवल स्वास्थ्य या पर्यावरण का संकट नहीं है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों का संकट है," सेव द चिल्ड्रन के एशिया क्षेत्रीय निदेशक अर्शद मलिक ने कहा।

पर्यावरण मंत्रालय के सैटेलाइट डेटा से पता चलता है कि मध्य कालीमंतन सबसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्र है, जहां 2,459 हॉटस्पॉट पाए गए हैं। इसके बाद दक्षिण सुमात्रा (1,445 हॉटस्पॉट) और पश्चिम कालीमंतन (928 हॉटस्पॉट) का नंबर आता है। जनवरी से जुलाई के बीच, वानिकी मंत्रालय ने 2,02,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि के जलने की पुष्टि की है।

क्षेत्रहॉटस्पॉट की संख्याप्रभाव का स्तर
मध्य कालीमंतन2,459अत्यधिक गंभीर
दक्षिण सुमात्रा1,445उच्च
पश्चिम कालीमंतन928मध्यम-उच्च

आग पर काबू पाने के लिए इंडोनेशिया ने अंतरराष्ट्रीय मदद ली है। जापान, अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूक्रेन जैसे देशों ने अपने अग्निशमन विमान उपलब्ध कराए हैं। इसके बावजूद, धुंध का स्तर इतना अधिक है कि बच्चों में तीव्र श्वसन संक्रमण (acute respiratory infections) का खतरा बढ़ गया है।

क्या आप जानते हैं?: पीटलैंड की आग सतह की आग से कहीं अधिक खतरनाक होती है क्योंकि यह जमीन के नीचे सुलगती रहती है, जिससे इसे पूरी तरह बुझाना लगभग असंभव हो जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यह धुआं मलेशिया और फिलीपींस जैसे अन्य देशों तक कैसे पहुंच गया?
उत्तर 1: उच्च ऊंचाई वाली हवाएं इन जहरीले कणों को सीमाओं के पार ले जाती हैं, जिसे 'ट्रांसबाउंड्री हेज़' कहा जाता है।

प्रश्न 2: कुल कितने छात्र इस संकट से प्रभावित हुए हैं?
उत्तर 2: राष्ट्रीय स्तर पर 14 लाख से अधिक छात्र ऑनलाइन शिक्षा पर मजबूर हुए हैं, जिनमें से 2.5 लाख अकेले पालेमबांग क्षेत्र के हैं।