अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कोलंबिया, इक्वाडोर और पेरू की यात्रा के दौरान दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ व्यापार और सैन्य सहयोग बढ़ाने की घोषणा की है। यह कदम क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने और दक्षिणपंथी गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

  • अमेरिका कोलंबिया, पेरू और इक्वाडोर के साथ नए व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में है।
  • चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए 'डोन्रो doctrine' (Donroe Doctrine) के तहत रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं।
  • कोलंबिया के राष्ट्रपति अबेलार्डो डी ला एस्प्रीएला ने सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लैटिन अमेरिका के तीन प्रमुख देशों—कोलंबिया, इक्वाडोर और पेरू—की यात्रा की है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दक्षिण अमेरिका में अमेरिका के रणनीतिक हितों को सुरक्षित करना और right-wing (दक्षिणपंथी) सरकारों के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करना है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इन देशों के साथ न केवल आर्थिक जुड़ाव चाहता है, बल्कि क्षेत्रीय आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों से निपटने के लिए एक साझा सुरक्षा ढांचा तैयार करना चाहता है।

कोलंबिया की यात्रा के दौरान, रुबियो ने राष्ट्रपति अबेलार्डो डी ला एस्प्रीएला से मुलाकात की। इस बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों और नागरिक परमाणु सहयोग पर समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। डी ला एस्प्रीएला, जो हाल ही में सत्ता में आए हैं, ने पूर्व राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो की वामपंथी नीतियों को छोड़कर अमेरिका के साथ सैन्य संबंधों को प्राथमिकता देने का वादा किया है। उन्होंने विशेष रूप से रडार और ड्रोन तकनीक के लिए अमेरिकी सहायता मांगी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कूटनीतिक दौरा केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई है। अमेरिका का लक्ष्य 'Shield of the Americas' (Americas Counter Cartel Coalition - ACCC) के माध्यम से लैटिन अमेरिका में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाना है। यह विशेष रूप से पेरू जैसे देशों में चीन के प्रभाव को कम करने की कोशिश है, जहाँ चीन पहले से ही अमेरिका को पछाड़कर शीर्ष व्यापारिक भागीदार बन चुका है।

लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी लहर और ट्रंप प्रशासन की 'डोन्रो डॉक्ट्रिन' मिलकर पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के नियंत्रण को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

इस रणनीतिक बदलाव के साथ, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला और कैरिबियन सागर में घातक सैन्य कार्रवाइयों को मंजूरी दी है, जिसे ड्रग तस्करी के खिलाफ युद्ध बताया जा रहा है। हालांकि, इस दृष्टिकोण को स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। कोलंबियाई विपक्षी नेता इवान सेपेडा ने इन समझौतों को 'संप्रभुता का समर्पण' करार दिया है और हथियारों के नियमों में ढील देने की आलोचना की है।

ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका और लैटिन अमेरिका के संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। जहाँ एक समय अमेरिका ने इस क्षेत्र में हस्तक्षेप किया, वहीं अब वह चीन के 'बेल्ट एंड रोड' जैसे आर्थिक निवेशों का मुकाबला करने के लिए लोकतांत्रिक और दक्षिणपंथी सहयोगियों की तलाश कर रहा है।

विशेषता पिछली नीति (वामपंथी) वर्तमान नीति (दक्षिणपंथी/ट्रंप)
सुरक्षा दृष्टिकोण सामाजिक सुधार और वार्ता सैन्यीकरण और कठोर कार्रवाई
अमेरिकी संबंध तनावपूर्ण/दूरी गहरा रणनीतिक और सैन्य सहयोग
व्यापार प्राथमिकता विविध वैश्विक साझेदार अमेरिका-केंद्रित व्यापार सौदे
क्या आप जानते हैं?: पेरू और चीन के बीच 2009 में एक मुक्त व्यापार समझौता हुआ था, जिसने चीन को दक्षिण अमेरिका के इस हिस्से में एक आर्थिक महाशक्ति बना दिया।

Frequently Asked Questions

1. 'Shield of the Americas' क्या है?
यह एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा (ACCC) है जिसका उद्देश्य अमेरिकी सैन्य भागीदारी के माध्यम से नशीली दवाओं और संगठित अपराध का मुकाबला करना है।

2. कोलंबिया के नए राष्ट्रपति का दृष्टिकोण क्या है?
राष्ट्रपति डी ला एस्प्रीएला अपराध के खिलाफ सैन्य दृष्टिकोण अपनाने और अमेरिका के साथ सुरक्षा संबंधों को फिर से स्थापित करने के पक्षधर हैं।