रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोलंबो में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिसानयके से मुलाकात कर रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत किया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने वायु रक्षा प्रणालियों और सैन्य प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- 38 वर्षों में श्रीलंका का दौरा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री बने राजनाथ सिंह।
- श्रीलंकाई वायु सेना की L70 गन के अपग्रेडेशन के लिए समझौता हुआ।
- राष्ट्रपति डिसानयके ने आश्वासन दिया कि श्रीलंका की जमीन का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होगा।
- एनसीसी और नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिसानयके के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। यह यात्रा रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 38 वर्षों में कोई भी भारतीय रक्षा मंत्री श्रीलंका का दौरा नहीं कर पाया था। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य रक्षा, आर्थिक, समुद्री और क्षेत्रीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना था।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने सुरक्षा, विकास, पुनर्वास सहायता और सैन्य सहयोग जैसे व्यापक मुद्दों पर चर्चा की। भारत ने श्रीलंका की वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण अनुदान प्रदान किया है, जिसके तहत श्रीलंकाई वायु सेना की छह L70 गन का अपग्रेडेशन किया जाएगा। इसके अलावा, दोनों देशों के नेशनल कैडेट कोर (NCC) और नेशनल डिफेंस कॉलेजों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान किया गया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत के 'नेबरहुड फर्स्ट' विजन को पुख्ता करती है। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच, श्रीलंका का यह आश्वासन कि वह अपनी जमीन का उपयोग भारत की सुरक्षा के खिलाफ नहीं करेगा, नई दिल्ली के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह केवल सैन्य सहयोग नहीं, बल्कि एक रणनीतिक विश्वास बहाली का प्रयास है।
"यह दौरा दक्षिण एशिया में सुरक्षा वास्तुकला को पुनर्गठित करने और समुद्री सुरक्षा के प्रति एक साझा दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।"
राष्ट्रपति डिसानयके ने भारत द्वारा 'ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत चक्रवात डितवाह के दौरान दी गई सहायता और पुनर्निर्माण पैकेज के लिए आभार व्यक्त किया। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत एक 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' के रूप में हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा रहेगा। इसके साथ ही, दोनों नेताओं ने भारतीय रक्षा बलों द्वारा निर्मित तीन बेली पुलों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करते हुए, राष्ट्रपति डिसानयके ने नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ अपने राष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत का समर्थन मांगा। उन्होंने भारत में कैद श्रीलंकाई ड्रग तस्करों के प्रत्यर्पण (extradition) के मुद्दे पर भी चर्चा की। साथ ही, दोनों देशों ने मछुआरों के बीच विवाद को सुलझाने और उनके आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आपसी सहमति जताई।
यात्रा के समापन पर, राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री हरिणी अमरसूर्या से मुलाकात की, जहां उन्होंने साझा विरासत, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों 'सिस्टर डेमोक्रेसी' के रूप में क्षेत्रीय शांति और समृद्धि के लिए एक साझा विकासात्मक दृष्टिकोण पर काम करना जारी रखेंगे।
Frequently Asked Questions
1. राजनाथ सिंह की श्रीलंका यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि वह 38 वर्षों में श्रीलंका का दौरा करने वाले पहले भारतीय रक्षा मंत्री हैं, जो दोनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक संबंधों के पुनरुद्धार का संकेत देता है।
भारत ने श्रीलंकाई वायु सेना की L70 गन के अपग्रेडेशन के लिए अनुदान दिया है और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बेली पुलों का निर्माण किया है।