रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की श्रीलंका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसनायके ने स्पष्ट किया कि श्रीलंका की धरती का उपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
- श्रीलंका ने आश्वासन दिया कि उसकी धरती का उपयोग भारत की सुरक्षा के खिलाफ नहीं होगा।
- भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
- 38 वर्षों में पहली बार किसी भारतीय रक्षा मंत्री ने श्रीलंका का दौरा किया है।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीन दिवसीय श्रीलंका यात्रा ने दक्षिण एशियाई कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। कोलंबो में श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसनायके के साथ उच्च स्तरीय बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति और समृद्धि पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रपति दिसनायके का वह आश्वासन था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि श्रीलंका अपनी सीमाओं के भीतर किसी भी ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं देगा जो भारत के सुरक्षा हितों के लिए हानिकारक हो।
यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। विशेष रूप से, श्रीलंका में चीन के बढ़ते प्रभाव और वहां के बंदरगाहों व जलक्षेत्र में चीनी उपस्थिति ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश राष्ट्रपति दिसनायके तक पहुँचाया और दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को रेखांकित किया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति इसे हिंद महासागर का 'प्रहरी' बनाती है। यदि श्रीलंका की धरती का उपयोग किसी शत्रु देश द्वारा भारत के खिलाफ किया जाता है, तो यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा होगा। राष्ट्रपति दिसनायके का यह बयान भारत को यह विश्वास दिलाता है कि नई सरकार भारत के साथ संतुलित और भरोसेमंद संबंध बनाए रखना चाहती है।
"हिंद महासागर में स्थिरता के लिए भारत और श्रीलंका का रक्षा तालमेल न केवल द्विपक्षीय आवश्यकता है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है।"
बैठक के दौरान रक्षा सहयोग को ठोस रूप देने के लिए तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें श्रीलंका वायु सेना द्वारा संचालित छह L70 एयर डिफेंस गन के अपग्रेडेशन का समझौता शामिल है, जिसका पूरा वित्तपोषण भारत सरकार द्वारा अनुदान के रूप में किया जाएगा। इसके अलावा, दोनों देशों के नेशनल डिफेंस कॉलेज और नेशनल कैडेट कोर (NCC) के बीच शैक्षणिक सहयोग और युवा विनिमय कार्यक्रमों को औपचारिक रूप दिया गया है।
रक्षा मंत्री ने संकट के समय श्रीलंका के लिए भारत की 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' (First Responder) की भूमिका को दोहराया। राष्ट्रपति दिसनायके ने चक्रवात 'डिटवाह' के दौरान 'ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत भारत द्वारा प्रदान की गई राहत और पुनर्निर्माण पैकेज के लिए आभार व्यक्त किया। यात्रा के अंत में, दोनों नेताओं ने भारतीय रक्षा बलों द्वारा निर्मित तीन बेली पुलों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।
| सहयोग क्षेत्र | मुख्य विवरण |
|---|---|
| सैन्य उपकरण | 6 L70 एयर डिफेंस गन का अपग्रेडेशन (भारतीय अनुदान द्वारा) |
| शैक्षणिक संबंध | नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच सहयोग |
| युवा सशक्तिकरण | NCC कैडेट्स के लिए एक्सचेंज प्रोग्राम |
Frequently Asked Questions
1. श्रीलंका ने भारत को सुरक्षा के संबंध में क्या आश्वासन दिया?
राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसनायके ने आश्वासन दिया कि श्रीलंका अपनी धरती का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने देगा।
2. भारत और श्रीलंका के बीच किन रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर हुए?
तीन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए: L70 एयर डिफेंस गन का अपग्रेडेशन, नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच शैक्षणिक सहयोग, और NCC कैडेट्स के लिए युवा विनिमय कार्यक्रम।