नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले, सदस्य देशों के बीच पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर गहरे मतभेद हैं। भारतीय शेरपा ईरान और यूएई के बीच की खाई को पाटकर एक सर्वसम्मत साझा घोषणापत्र तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
- भारत नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसमें पुतिन और शी जिनपिंग जैसे वैश्विक नेता शामिल होंगे।
- ईरान और यूएई के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष साझा घोषणापत्र (Joint Declaration) के लिए सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे।
- शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' है।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और पश्चिम एशिया में भड़कती आग ने ब्रिक्स के भीतर एक वैचारिक विभाजन पैदा कर दिया है। 11 सदस्य देशों के सबसे वरिष्ठ वार्ताकार, जिन्हें 'शेरपा' कहा जाता है, दिन-रात एक कर रहे हैं ताकि 12-13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन के लिए एक साझा घोषणापत्र तैयार किया जा सके।
विवाद का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया का युद्ध है। ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे सदस्य देश इस मेज पर मौजूद हैं, जिनके हित आपस में टकरा रहे हैं। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद, तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें यूएई भी शामिल था। पिछले छह महीनों से यूएई और ईरान के संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे हैं, जिससे ब्रिक्स के भीतर आम सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन भारत के लिए अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को साबित करने का एक बड़ा अवसर है। यदि भारत ईरान और यूएई जैसे प्रतिद्वंद्वियों को एक साझा मंच पर लाने में सफल रहता है, तो यह वैश्विक दक्षिण (Global South) के नेता के रूप में भारत की छवि को और मजबूत करेगा। यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
"ब्रिक्स का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि क्या यह समूह अपने आंतरिक विरोधाभासों को दरकिनार कर वैश्विक शासन में सुधार के लिए एक एकजुट आवाज बन सकता है।"
शिखर सम्मेलन के एजेंडे में खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दे शामिल हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संकट ने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को प्रभावित किया है, जिसे भारत साझा घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल करना चाहता है। सम्मेलन की शुरुआत 'समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने' विषय पर एक बंद कमरे की बैठक से होगी।
भारत की अध्यक्षता चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है: लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और स्थिरता (Sustainability)। इसके तहत स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
| क्षेत्र | मुख्य फोकस (भारत की अध्यक्षता) | संभावित चुनौती |
|---|---|---|
| सुरक्षा | ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा | पश्चिम एशिया का युद्ध |
| तकनीक | AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर | चीन के साथ निवेश प्रतिबंध |
| राजनीति | बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था | पश्चिमी देशों के साथ संतुलन |
Frequently Asked Questions
1. इस शिखर सम्मेलन में कौन से प्रमुख नेता शामिल हो रहे हैं?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा की भागीदारी की पुष्टि हुई है।
2. भारत के लिए इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भारत का उद्देश्य वैश्विक शासन में सुधार लाना और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखना है।