ब्रिक्स एक ढीले आर्थिक समूह से विकसित होकर ग्लोबल साउथ के लिए एक शक्तिशाली मंच बन गया है, जो वित्तीय स्वतंत्रता और बहुध्रुवीय कूटनीति के माध्यम से पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती दे रहा है।

  • ब्रिक्स एक सुधारवादी, गैर-पश्चिमी संगठन है, न कि कोई पश्चिमी-विरोधी गुट।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) बिना किसी राजनीतिक शर्त के बुनियादी ढांचे के लिए महत्वपूर्ण वित्त पोषण प्रदान करता है।
  • 2003 से 2024 के बीच ब्रिक्स देशों के आंतरिक व्यापार में 13 गुना वृद्धि हुई है, जो $1.17 ट्रिलियन तक पहुंच गया है।
  • भारत ब्रिक्स का उपयोग पश्चिम और विकासशील देशों के बीच एक रणनीतिक सेतु के रूप में कर रहा है।

पिछले दो दशकों में, ब्रिक्स (BRICS) ने खुद को पूरी तरह बदल लिया है। पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक ढीले समूह से शुरू होकर, यह अब ग्लोबल साउथ का सबसे प्रभावशाली संगठन बन गया है। नरेन्द्र मोदी, शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन जैसे वैश्विक नेताओं की प्रतिबद्धता ने इसे एक नई ऊंचाई दी है, जो पश्चिमी देशों के इस दावे के विपरीत है कि ब्रिक्स एक विभाजित घर है।

वर्तमान दुनिया एक अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। पारंपरिक वैश्विक शासन संस्थान अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) शक्तिशाली देशों की आधिपत्यवादी महत्वाकांक्षाओं से संप्रभु राज्यों की रक्षा करने में असमर्थ रहा है, जबकि विश्व व्यापार संगठन (WTO) निष्क्रिय होता जा रहा है। ऐसे में, ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के देशों को अपनी चिंताओं को साझा करने और एक साझा रणनीति बनाने का मंच प्रदान करता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स की असली ताकत उसकी विविधता में है। लोकतंत्र, अधिनायकवाद और राजशाही जैसी विभिन्न राजनीतिक प्रणालियों को एक साथ लाकर, यह साबित करता है कि साझा रणनीतिक हित वैचारिक मतभेदों से ऊपर हो सकते हैं। यह बहुलवाद दुनिया को एक ऐसे बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर ले जा रहा है जहाँ सत्ता किसी एक पश्चिमी राजधानी तक सीमित नहीं रहेगी।

विशेषतापारंपरिक संस्थान (IMF/WB)ब्रिक्स (NDB)
शर्तेंकठोर राजनीतिक शर्तेंकोई राजनीतिक शर्त नहीं
दृष्टिकोणपश्चिमी-केंद्रितगैर-पश्चिमी/बहुलवादी
मुद्रा फोकसअमेरिकी डॉलर का प्रभुत्वस्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा

इस संगठन की सबसे बड़ी उपलब्धि न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (CRA) का निर्माण है। NDB ने लगभग $39 बिलियन की लागत वाली 120 टिकाऊ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तपोषित किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि NDB का ऋण IMF और विश्व बैंक के विपरीत किसी राजनीतिक शर्त के साथ नहीं आता है, जिससे विकासशील देशों की संप्रभुता सुरक्षित रहती है।

ब्रिक्स का उद्देश्य एक नई विश्व व्यवस्था बनाना नहीं है, बल्कि मौजूदा व्यवस्था का लोकतंत्रीकरण करना और उसे बहुध्रुवीय बनाना है।

आर्थिक मोर्चे पर, ब्रिक्स वैश्विक व्यापार के 20% से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। UNCTAD की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच आंतरिक व्यापार 2003 के $84 बिलियन से बढ़कर 2024 में $1.17 ट्रिलियन हो गया है। इसके अलावा, भारत, रूस, चीन और यूएई के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान की प्रक्रिया 'डी-डलराइजेशन' (डॉलर पर निर्भरता कम करना) की दिशा में एक बड़ा कदम है।

भारत के लिए, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन खुद को ग्लोबल साउथ की अग्रणी आवाज के रूप में स्थापित करने का एक अनूठा अवसर है। नई दिल्ली ने सफलतापूर्वक पश्चिम और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक पुल का काम किया है। हालांकि शिखर सम्मेलन का ध्यान तकनीकी सहयोग पर है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता यूक्रेन और ईरान जैसे संघर्षों को सुलझाने की क्षमता में निहित होगी।

क्या आप जानते हैं?: पिछले दो दशकों में ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार में 13 गुना वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि आर्थिक पूरकता राजनीतिक मतभेदों से अधिक शक्तिशाली होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ब्रिक्स एक पश्चिमी-विरोधी संगठन है?
नहीं, ब्रिक्स खुद को एक गैर-पश्चिमी संगठन के रूप में पहचानता है। इसका चरित्र सुधारवादी है, जिसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का लोकतंत्रीकरण करना है।

क्या ब्रिक्स जल्द ही अपनी साझा मुद्रा लॉन्च करेगा?
हालांकि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन सदस्य देशों के बीच भारी आर्थिक असमानता के कारण निकट भविष्य में एक साझा मुद्रा की संभावना कम है।