ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने नई दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह दौरा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का भारत का पहला आधिकारिक दौरा।
- पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के बीच शुक्रवार शाम को उच्च स्तरीय बैठक।
- ब्रिक्स दिल्ली घोषणापत्र पर ईरान और यूएई के बीच कूटनीतिक मतभेद।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा संभव।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ब्रिक्स (BRICS) नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। राष्ट्रपति के रूप में यह उनका भारत का पहला दौरा है। वह शुक्रवार शाम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह यात्रा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि फरवरी 2018 में राष्ट्रपति हसन रूहानी की यात्रा के बाद यह पहली बार है जब कोई ईरानी राष्ट्रपति भारत आ रहा है।
पेज़ेशकियन का यह दौरा एक ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के साथ एक गंभीर सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष में उलझा हुआ है। पिछले छह महीनों में ईरान ने युद्ध की चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन इस प्रक्रिया में उसे भारी आर्थिक और रणनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बैठक केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकती है। भारत की स्थिति ऐसी है कि वह पश्चिम और ईरान दोनों के साथ संतुलित संबंध रखता है। जब ईरान ने बिश्केक में मोदी से मुलाकात की थी, तब उन्होंने भारत से इस युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थता करने का अनुरोध किया था। भारत की यह क्षमता उसे पश्चिम एशिया में एक 'शांतिदूत' के रूप में स्थापित करती है।
"भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक स्तर पर उसकी स्वीकार्यता इसे ईरान और पश्चिम के बीच एक सेतु बनाने के लिए सबसे उपयुक्त देश बनाती है।"
इस शिखर सम्मेलन की एक बड़ी चुनौती ब्रिक्स दिल्ली घोषणापत्र (Delhi Declaration) को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) कूटनीतिक भाषा को लेकर एकमत नहीं हो पाए हैं। भारत, रूस, ब्राजील और मिस्र के वरिष्ठ वार्ताकार (Sherpas) दोनों देशों को आम सहमति पर लाने के लिए कड़ा प्रयास कर रहे हैं ताकि शिखर सम्मेलन का समापन एक साझा दस्तावेज के साथ हो सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की है और जोर दिया है कि सभी विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। विशेष रूप से, भारत ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के ऊर्जा आयात के लिए जीवन रेखा है।
Frequently Asked Questions
1. क्या यह राष्ट्रपति पेज़ेशकियन की पहली भारत यात्रा है?
हाँ, राष्ट्रपति के रूप में यह मसूद पेज़ेशकियन की पहली आधिकारिक भारत यात्रा है।
2. ब्रिक्स घोषणापत्र में मुख्य विवाद क्या है?
ईरान और यूएई के बीच कूटनीतिक भाषा के चयन को लेकर मतभेद हैं, जिसे सुलझाने की कोशिश भारत और अन्य सदस्य देश कर रहे हैं।