UNICEF की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जलवायु आपदाओं ने वैश्विक स्तर पर 171 मिलियन से अधिक छात्रों की शिक्षा को प्रभावित किया है, जिसमें लड़कियां सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं।
- वैश्विक स्तर पर 10% छात्रों की शिक्षा जलवायु खतरों के कारण बाधित हुई।
- कुल 171 मिलियन से अधिक छात्र प्रभावित, जिनमें लड़कियों पर प्रतिकूल प्रभाव अधिक रहा।
- तूफान, बाढ़ और लू (heatwaves) स्कूल बंद होने और बुनियादी ढांचे के विनाश के मुख्य कारण रहे।
- अक्षम कार्रवाई से छात्रों की आजीवन कमाई में 200 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र बाल एजेंसी UNICEF द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट 'लर्निंग इंटरप्टेड: ग्लोबल स्नैपशॉट ऑफ क्लाइमेट-रिलेटेड स्कूल डिस्रप्शन्स इन 2025' ने दुनिया भर में शिक्षा प्रणाली पर मंडराते जलवायु संकट की भयावह तस्वीर पेश की है। 106 देशों और क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए, रिपोर्ट बताती है कि प्री-प्राइमरी से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के 10 में से एक छात्र की पढ़ाई जलवायु आपदाओं के कारण बीच में ही रुक गई।
रिपोर्ट के अनुसार, तूफान सबसे विनाशकारी साबित हुए, जिन्होंने दुनिया भर में 109 मिलियन छात्रों को प्रभावित किया। इसके बाद बाढ़ (70 मिलियन) और भीषण लू (50 मिलियन) का स्थान रहा। इन आपदाओं ने न केवल स्कूलों के दरवाजों को बंद किया, बल्कि स्कूल की इमारतों को नष्ट कर दिया, शिक्षण समय को कम किया और छात्रों के बीच स्कूल छोड़ने (dropout) के जोखिम को काफी बढ़ा दिया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं है, बल्कि एक गहरा सामाजिक-आर्थिक संकट है। 75% प्रभावित बच्चे निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं, जहाँ शिक्षा प्रणालियों में आपदा प्रबंधन के संसाधनों का अभाव है। जब स्कूल नष्ट होते हैं, तो यह केवल एक इमारत का गिरना नहीं होता, बल्कि लाखों बच्चों के भविष्य का ढहना होता है।
जलवायु खतरे केवल कक्षाओं को बाधित नहीं करते; वे स्कूलों को नष्ट करते हैं, परिवारों को विस्थापित करते हैं और सबसे कमजोर बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित करते हैं।
रिपोर्ट में विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव पर चिंता जताई गई है। असुरक्षित वातावरण, स्वच्छता सुविधाओं की कमी और पारिवारिक आय में गिरावट के कारण लड़कियों पर घरेलू काम और पानी जुटाने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। यह स्थिति न केवल उन्हें स्कूल से दूर करती है, बल्कि बाल विवाह के जोखिम को भी बढ़ा देती है, जिससे उनके वापस स्कूल लौटने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।
आर्थिक दृष्टिकोण से, यह संकट भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा। UNICEF का अनुमान है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो केवल 2025 में बाधित हुई शिक्षा के कारण छात्रों की आजीवन कमाई में कम से कम 200 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
| जलवायु खतरा | प्रभावित छात्रों की संख्या (मिलियन) |
|---|---|
| तूफान (Storms) | 109 |
| बाढ़ (Floods) | 70 |
| लू (Heatwaves) | 50 |
UNICEF ने दुनिया भर की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों से अपील की है कि वे जलवायु-प्रतिरोधी (climate-resilient) शैक्षिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में निवेश बढ़ाएं ताकि भविष्य की आपदाओं के दौरान भी शिक्षा निरंतर बनी रहे।
Frequently Asked Questions
1. जलवायु आपदाएं लड़कियों की शिक्षा को अधिक प्रभावित क्यों करती हैं?
सुरक्षा की कमी, स्वच्छता सुविधाओं का नष्ट होना और पारिवारिक आय घटने पर घरेलू जिम्मेदारियों का बोझ लड़कियों पर अधिक आता है, जिससे बाल विवाह का खतरा बढ़ता है।
2. इस संकट का दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव क्या है?
अनुमान है कि शिक्षा में व्यवधान के कारण प्रभावित छात्रों की आजीवन कमाई में 200 अरब डॉलर की कमी आ सकती है।