भाजपा उपाध्यक्ष राम माधव ने वैश्विक व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर चर्चा करते हुए बताया कि कैसे BRICS और G20 जैसे मंच 'ग्लोबल साउथ' को सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने बिग टेक के बढ़ते प्रभाव और भारत की संतुलित विदेश नीति पर जोर दिया।
- BRICS दुनिया की 60% से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।
- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी पुरानी वैश्विक व्यवस्था समाप्त हो रही है और एक नए 'हेटरो पोलरिटी' युग का उदय हो रहा है।
- भारत-चीन व्यापार घाटा और सीमा विवादों को BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों के बजाय द्विपक्षीय स्तर पर सुलझाया जा रहा है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग टेक कंपनियों के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक नैतिक ढांचे की आवश्यकता है।
हाल ही में वैश्विक मामलों पर एक विस्तृत चर्चा के दौरान, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और विदेश नीति विशेषज्ञ राम माधव ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की रणनीतिक स्थिति का विश्लेषण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि BRICS, G20, SCO और क्वाड (Quad) जैसे संगठन भारत के लिए केवल राजनयिक औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि वैश्विक प्रभाव बढ़ाने के साधन हैं।
राम माधव ने इस बात पर जोर दिया कि ग्लोबल साउथ अब केवल अनुसरण करने वाला नहीं, बल्कि नेतृत्व प्रदान करने वाला समूह बन गया है। उन्होंने तर्क दिया कि BRICS जैसे संगठन दुनिया की अधिकांश आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे यह विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक स्तर पर उठाने का सबसे सशक्त माध्यम बन गया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that India is strategically positioning itself as a 'bridge' between the developed West and the developing Global South. By maintaining membership in both the Quad (security-focused) and BRICS (economy-focused), India is avoiding alignment with any single power bloc, thereby maximizing its strategic autonomy in a volatile geopolitical climate.
भारत और चीन के संबंधों पर बात करते हुए, उन्होंने स्पष्ट किया कि 159 बिलियन डॉलर के कुल व्यापार में 100 बिलियन डॉलर का व्यापार घाटा एक गंभीर मुद्दा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीमा विवाद और व्यापारिक असंतुलन जैसे संवेदनशील मुद्दों को BRICS शिखर सम्मेलनों के बजाय द्विपक्षीय वार्ताओं के माध्यम से हल करना अधिक प्रभावी होता है।
"द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था अब समाप्त हो रही है, और हम एक ऐसे संक्रमण काल में हैं जहाँ अनियंत्रित शक्तियाँ उभर रही हैं।"
राम माधव ने 'हेटरो पोलरिटी' (Hetero Polarity) की अवधारणा पेश की, जिसमें उन्होंने बताया कि अब केवल देश ही शक्तिशाली नहीं हैं, बल्कि बड़ी टेक कंपनियां और वैश्विक निवेशक भी राज्य जैसी शक्तियां रखते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि AI और संसाधन प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय नैतिक नियम नहीं बनाए गए, तो यह वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: BRICS ग्लोबल साउथ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: क्योंकि यह दुनिया की 60% से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और विकासशील देशों को विकसित देशों के प्रभुत्व के खिलाफ एक सामूहिक मंच प्रदान करता है।
प्रश्न 2: 'हेटरो पोलरिटी' का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है एक ऐसी व्यवस्था जहाँ शक्ति केवल सरकारों के पास नहीं, बल्कि बिग टेक कंपनियों और बड़े निवेशकों जैसे गैर-राज्य अभिनेताओं के पास भी केंद्रित है।