राम माधव ने भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' रणनीति का विश्लेषण करते हुए बताया कि कैसे I2U2 और ब्रिक्स जैसे छोटे समूह भविष्य की वैश्विक शक्ति के केंद्र बनेंगे और भारत इनमें अग्रणी भूमिका निभाएगा।
- भारत रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपना रहा है, ताकि किसी एक स्थायी गठबंधन का हिस्सा बनकर अपनी स्वतंत्रता न खोए।
- भविष्य में बड़े संगठनों के बजाय 'मिनी-लेटरल' (छोटे समूहों) का प्रभाव बढ़ेगा।
- ब्रिक्स (BRICS) वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
- भारत G20, SCO और QUAD जैसे विभिन्न मंचों का उपयोग अपनी वैश्विक स्थिति मजबूत करने के लिए कर रहा है।
इंडिया टुडे ब्रिक्स राउंडटेबल के ‘संघ शक्ति संवाद’ सत्र में राम माधव ने भारत की विदेश नीति के गहरे पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया एक ऐसे दौर में है जहां पुराने वैश्विक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में G20, ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), क्वाड (QUAD) और बिम्सटेक जैसे अलग-अलग मंचों में भारत की सक्रियता उसकी रणनीतिक जरूरत है, न कि कोई विरोधाभास।
राम माधव के अनुसार, अब वह समय चला गया जब देश किसी एक स्थायी सैन्य या राजनीतिक गुट का हिस्सा बनते थे। उन्होंने तर्क दिया कि आने वाले समय में सहयोग 'मुद्दों' के आधार पर होगा। भारत का 'वसुधैव कुटुंबकम' का दृष्टिकोण उसे इस योग्य बनाता है कि वह दुनिया के किसी भी नए समूह में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, भारत एक 'ब्रिज पावर' (Bridge Power) के रूप में उभर रहा है। पश्चिम और वैश्विक दक्षिण के बीच संतुलन बनाकर भारत न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि वैश्विक व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में अपनी सौदेबाजी की शक्ति (Bargaining Power) को भी बढ़ा रहा है।
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा ब्रिक्स की उपयोगिता पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए राम माधव ने इसे ‘नाराज फूफा एटीट्यूड’ करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच की सफलता को केवल तात्कालिक लाभ से नहीं मापा जा सकता। ब्रिक्स आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का एक ऐसा मंच है, जो पश्चिमी प्रभुत्व को संतुलित कर रहा है।
"21वीं सदी बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ चुकी है, जहां छोटे और केंद्रित समूह नए शक्ति केंद्र बनेंगे।"
चीन के साथ जारी सीमा विवाद पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स द्विपक्षीय विवाद सुलझाने का मंच नहीं है। भारत और चीन के मुद्दे द्विपक्षीय स्तर पर हल होंगे, जबकि ब्रिक्स का ध्यान वैश्विक दक्षिण के साझा हितों पर रहेगा। उन्होंने 2023 के G20 शिखर सम्मेलन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के तनाव के बावजूद सभी देशों के बीच आम सहमति बनाने में सफलता पाई थी।
अंत में, उन्होंने I2U2 (भारत, इजरायल, यूएई और अमेरिका) जैसे समूहों का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य 'मिनी-लेटरल' समूहों का है। ये छोटे समूह निवेश, सुरक्षा और रणनीतिक हितों के आधार पर अधिक तेजी से और प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारत एक ही समय में QUAD और BRICS दोनों का हिस्सा क्यों है?
क्योंकि QUAD हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर केंद्रित है, जबकि BRICS विकासशील देशों की आर्थिक और राजनीतिक आवाज है।
प्रश्न 2: क्या चीन के साथ विवाद के बावजूद ब्रिक्स में काम करना संभव है?
हाँ, क्योंकि ब्रिक्स का नियम 'आम सहमति' है और यह द्विपक्षीय मुद्दों के बजाय वैश्विक व्यवस्था के मुद्दों पर काम करता है।