प्रसिद्ध अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने कहा है कि अमेरिका की अस्थिरता के बीच भारत और चीन मिलकर एक नई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बना सकते हैं। उन्होंने भारत को 'क्वाड' छोड़ने और चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने की सलाह दी है।
- जेफ्री सैक्स के अनुसार अमेरिका की 'एकतरफा मानसिकता' दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
- भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार एक संतुलित वैश्विक प्रणाली के लिए अनिवार्य है।
- BRICS को अमेरिकी साम्राज्यवाद का विरोध करना चाहिए और बहु-मुद्रा भुगतान प्रणाली अपनानी चाहिए।
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे ब्रिक्स राउंडटेबल 2026 के दौरान, दुनिया के शीर्ष अर्थशास्त्रियों में शुमार जेफ्री सैक्स ने वैश्विक राजनीति पर एक विस्फोटक विश्लेषण पेश किया। सैक्स ने तर्क दिया कि जैसे-जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका आंतरिक और बाहरी रूप से अस्थिर हो रहा है, भारत और चीन के पास एक ऐसी नई विश्व व्यवस्था (New World Order) बनाने का अवसर है जो अधिक न्यायसंगत और संतुलित हो।
सैक्स ने इस बात पर जोर दिया कि चीन की भारत की सफलता में बहुत अधिक दिलचस्पी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दिल्ली आना इसी बात का संकेत है कि चीन भारत को एक प्रतिस्पर्धी के बजाय एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। यह दौरा सात साल बाद शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी, जो गलवान घाटी संघर्ष के बाद संबंधों में आने वाली धीरे-धीरे बर्फ पिघलने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि जेफ्री सैक्स का यह बयान केवल एक आर्थिक राय नहीं, बल्कि एक भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है। यदि भारत वास्तव में 'क्वाड' (Quad) जैसे समूहों से दूरी बनाकर चीन के साथ तालमेल बिठाता है, तो यह वाशिंगटन के 'इंडो-पैसिफिक' विजन को पूरी तरह ध्वस्त कर सकता है। यह बदलाव एशिया को वैश्विक राजनीति का केंद्र बना देगा।
सैक्स ने एक विवादास्पद सुझाव देते हुए कहा कि भारत को क्वाड छोड़ देना चाहिए ताकि वह चीन के साथ अपने संबंधों को और प्रगाढ़ कर सके। उन्होंने कहा, "चीन की भारत की सफलता में बहुत बड़ी हिस्सेदारी है। अमेरिका अब अपनी मनमानी नहीं चला सकता।"
"हम एक बहुध्रुवीय दुनिया में हैं जहाँ अमेरिका की एकतरफा मानसिकता सबसे बड़ा खतरा है; अब समय है कि दुनिया के चार सुपरपावर सह-अस्तित्व सीखें।"
अर्थशास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन, ब्रिटेन या अमेरिका की तरह दुनिया का एकमात्र स्वामी (Hegemon) बनने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने भारत को दुनिया के चार सबसे शक्तिशाली देशों में से एक बताया और कहा कि भारत चीन के लिए दुनिया को बेहतर बनाने में एक महान भागीदार साबित हो सकता है।
ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के लिए सैक्स ने तीन मुख्य प्राथमिकताएं निर्धारित कीं: पहला, संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षीय प्रणाली की रक्षा करना; दूसरा, अमेरिका को ईरान युद्ध और सैन्य हस्तक्षेपों से पीछे हटने के लिए कहना; और तीसरा, एक ऐसी बहु-मुद्रा भुगतान प्रणाली विकसित करना जो अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम कर सके।
| विशेषता | अमेरिकी दृष्टिकोण (Unilateral) | सैक्स का प्रस्तावित दृष्टिकोण (Multipolar) |
|---|---|---|
| नेतृत्व | एकल प्रभुत्व (Hegemony) | साझा नेतृत्व (Co-existence) |
| व्यापार | प्रतिबंधों का उपयोग | स्वतंत्र व्यापारिक संबंध |
| रणनीति | चीन का मुकाबला (Containment) | एशियाई सहयोग (Collaboration) |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: जेफ्री सैक्स ने भारत को क्वाड छोड़ने की सलाह क्यों दी?
सैक्स का मानना है कि क्वाड चीन को घेरने के लिए बनाया गया है, जबकि भारत का असली हित चीन के साथ सहयोग करके एक नई वैश्विक व्यवस्था बनाने में है।
यह एक ऐसी प्रणाली है जिससे देश डॉलर के बजाय अन्य मुद्राओं में व्यापार कर सकें, जिससे अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों का असर कम हो जाए।