9/11 के आतंकी हमलों की 25वीं बरसी पर, हम विश्लेषण कर रहे हैं कि कैसे 'द हिंदू' ने न्यूयॉर्क और पेंटागन में हुए उस विनाशकारी हमले की जमीनी रिपोर्टिंग की जिसने दुनिया का नजरिया बदल दिया।

  • 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा द्वारा नियोजित हमलों में लगभग 3,000 लोगों की जान गई थी।
  • द हिंदू ने अपनी रिपोर्टिंग में शुरुआत से ही खुफिया विफलता (Intelligence Failure) और ओसामा बिन लादेन की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
  • इस हमले ने वैश्विक आतंकवाद के प्रति दुनिया के दृष्टिकोण और अमेरिका की घरेलू सुरक्षा नीतियों को पूरी तरह बदल दिया।

दुनिया आज 11 सितंबर के उन खौफनाक आतंकी हमलों की 25वीं बरसी मना रही है, जिसने न केवल अमेरिका को बल्कि पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया था। 2001 के उस काले दिन, न्यूयॉर्क शहर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जुड़वां मीनारें (Twin Towers) मलबे के ढेर में बदल गईं, जब दो वाणिज्यिक विमानों को आत्मघाती तरीके से उनसे टकराया गया। इसके साथ ही एक विमान ने पेंटागन को निशाना बनाया और चौथा विमान पेंसिल्वेनिया के खेतों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

इस त्रासदी की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एफबीआई (FBI) के अनुसार, इस हमले में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे, जिनमें न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डी.सी. और 27 अन्य राज्यों के नागरिक शामिल थे। अमेरिकी सेना के 75 जवान और 400 से अधिक फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स, जिनमें 60 कानून प्रवर्तन अधिकारी शामिल थे, इस आपदा की चपेट में आ गए। हजारों बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया, जिससे एक गहरा सामाजिक और मनोवैज्ञानिक घाव पैदा हुआ।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि 9/11 केवल एक हमला नहीं था, बल्कि यह आधुनिक खुफिया तंत्र की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक था। 'द हिंदू' की तत्कालीन रिपोर्टिंग ने समय रहते यह संकेत दिया था कि आतंकवाद अब केवल स्थानीय संघर्ष नहीं, बल्कि एक वैश्विक नेटवर्क (Global Network) बन चुका है। इसने भविष्य के 'आतंकवाद के खिलाफ युद्ध' (War on Terror) की नींव रखी, जिसने मध्य पूर्व की राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया।

द हिंदू के तत्कालीन विदेशी संवाददाता श्रीधर कृष्णस्वामी ने अपनी रिपोर्टिंग में इस बात पर जोर दिया था कि जिस सटीकता और समन्वय के साथ इन हमलों को अंजाम दिया गया, वह चौंकाने वाला था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि यह एक 'विशाल खुफिया विफलता' (Colossal Intelligence Failure) थी।

"अमेरिका अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा; वहां अब दर्द के साथ-साथ गहरा क्रोध भी है जो वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगा।"

जांच में यह सामने आया कि इस हमले के पीछे अल-कायदा का हाथ था। 19 अपहरणकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था, जिनमें से 15 सऊदी अरब से थे। इनमें मोहम्मद अता, मरवान अल-शेही और ज़ैद जराह जैसे पायलट शामिल थे, जिन्होंने जर्मनी के हैम्बर्ग में एक आतंकी सेल के रूप में काम किया था।

द हिंदू ने 12 सितंबर 2001 को अपने फ्रंट पेज पर "America under attack" की हेडलाइन के साथ इस त्रासदी को दुनिया के सामने रखा। आंतरिक पृष्ठों पर ओसामा बिन लादेन पर संदेह की सुई घुमाते हुए यह विश्लेषण किया गया कि कैसे तालिबान के इनकार के बावजूद, काबुल में छिपा यह आतंकवादी संगठन ही इस साजिश का मास्टरमाइंड था।

क्या आप जानते हैं?: 9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए 'डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी' (DHS) का गठन किया था।
विवरणप्रभाव/संख्या
कुल हताहतलगभग 3,000
निशाना बनाए गए स्थानWTC (NY), पेंटागन (DC), पेंसिल्वेनिया
मुख्य साजिशकर्ता संगठनअल-कायदा
अपहरणकर्ताओं की संख्या19

प्रश्न 1: 9/11 हमलों के लिए कौन जिम्मेदार था?
उत्तर: एफबीआई की जांच के अनुसार, इन हमलों की योजना और कार्यान्वयन अल-कायदा संगठन द्वारा किया गया था, जिसका नेतृत्व ओसामा बिन लादेन कर रहा था।

प्रश्न 2: द हिंदू ने इस घटना को किस तरह कवर किया?
उत्तर: द हिंदू ने जमीनी रिपोर्टिंग के माध्यम से खुफिया विफलताओं, ओसामा बिन लादेन की संदिग्ध भूमिका और हमले के मानवीय प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया था।