चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत आ रहे हैं, और इस बीच चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने भारत की कूटनीति की जमकर तारीफ की है। यह दौरा भारत-चीन संबंधों में एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।
- राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के लिए 7 साल बाद भारत आ रहे हैं।
- चीनी सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' ने भारत के कूटनीतिक रुख की सराहना की है।
- भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 151 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
- सीमा वार्ता के 25वें दौर में आठ सूत्री सहमति को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
एशियाई राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार और रविवार को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर होने वाली यह यात्रा सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही है, जिसे दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय और चीनी विशेषज्ञों के हवाले से भारत के कूटनीतिक दृष्टिकोण की खुलकर प्रशंसा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की यह पहल दोनों एशियाई शक्तियों के बीच संबंधों को स्थिर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। चीनी मीडिया का यह रुख भारतीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि आर्थिक अनिवार्यता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी 6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है और चीन अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है, जिसके साथ व्यापार 151 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। भारत अब अपनी विदेश नीति में संतुलन बना रहा है ताकि विकास के लिए केवल एक दिशा पर निर्भर न रहना पड़े।
भारतीय थिंक टैंक के प्रमुख मोहम्मद साकिब का मानना है कि इस यात्रा ने ब्रिक्स सम्मेलन के महत्व को वैश्विक स्तर पर बढ़ा दिया है। वहीं सिंघुआ यूनिवर्सिटी के छ्यान फंग ने संकेत दिया कि अगस्त में हुई सीमा वार्ता, जिसमें आठ सूत्री सहमति बनी थी, इस मुलाकात के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर चुकी है।
"भारत अपनी विदेश नीति को पुनर्गठित कर रहा है, क्योंकि वह समझ चुका है कि रणनीतिक स्वायत्तता के लिए पड़ोसियों के साथ व्यावहारिक संबंध आवश्यक हैं।"
नई दिल्ली में तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। भारत मंडपम को भव्य रूप दिया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस सम्मेलन में राष्ट्रपति पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति की मौजूदगी ने इसे 'नए वर्ल्ड ऑर्डर' की चर्चा का केंद्र बना दिया है।
| प्रमुख बिंदु | स्थिति / अनुमान |
|---|---|
| भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि (25-26) | 6.8% |
| भारत-चीन कुल व्यापार | 151 अरब डॉलर |
| शी जिनपिंग का अंतराल (यात्रा) | 7 वर्ष |
| सीमा वार्ता परिणाम | 8 सूत्री सहमति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: शी जिनपिंग की 7 साल बाद भारत यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह यात्रा सीमा विवादों के बाद रिश्तों को सामान्य करने और आर्थिक सहयोग को फिर से पटरी पर लाने का एक बड़ा अवसर है।
प्रश्न 2: ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट का क्या अर्थ है?
चूंकि यह एक सरकारी समर्थित अखबार है, इसकी तारीफ यह दर्शाती है कि बीजिंग अब भारत के प्रति अपने सख्त रुख में नरमी ला रहा है।