यमन के रणनीतिक तटरेखा पर हूतियों के तेजी से बढ़ते कदमों ने दुनिया को चौंका दिया है। इस सैन्य जीत से अब बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और वैश्विक तेल व्यापार पर ईरान की पकड़ और मजबूत हो गई है।

  • हूतियों ने यमन के तिहामा तटीय मैदान के लगभग 130 किमी हिस्से पर कब्जा कर लिया है।
  • ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब दोनों पर प्रभाव रखता है।
  • यह बढ़त वैश्विक ईंधन और तेल व्यापार के 35% से अधिक हिस्से के लिए खतरा है।
  • घरेलू राजनीतिक दबाव और आगामी चुनावों के कारण अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप की संभावना कम है।

यमन के शुष्क तटीय मैदान 'तिहामा' के दक्षिणी हिस्सों में हूतियों की बिजली जैसी तेजी से हुई प्रगति ने अधिकांश विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर दिया है। कुछ ही दिनों में, हूतियों ने सऊदी समर्थित 'नेशनल रेजिस्टेंस' के नियंत्रण वाले एक बड़े क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया। अनुमान है कि ईरान समर्थित इन विद्रोहियों ने देश की रणनीतिक तटरेखा के लगभग 130 किमी (81 मील) हिस्से पर कब्जा कर लिया है।

यह पिछले कई वर्षों में इस समूह की सबसे प्रभावशाली सैन्य जीत है। यह साबित करता है कि 12 साल लंबे गृहयुद्ध और अमेरिका, इजरायल और ब्रिटेन के हवाई हमलों के बावजूद, हूती एक शक्तिशाली सैन्य ताकत बने हुए हैं। अब जब उनके विरोधी मनोबल खो चुके हैं, तो उन्हें वहां से हटाना बेहद कठिन और महंगा होगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह केवल जमीन का टुकड़ा जीतने की बात नहीं है, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक खतरा है। ईरान अब सीधे तौर पर या अपने प्रॉक्सी के माध्यम से दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों—होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब—पर नियंत्रण रखता है। यह नियंत्रण दुनिया के 35% से अधिक ईंधन और तेल व्यापार को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

"अब ईरान, सीधे तौर पर और प्रॉक्सी के माध्यम से, मध्य पूर्व और दुनिया के दो सबसे रणनीतिक चोक पॉइंट्स को नियंत्रित करता है, जो वैश्विक तेल व्यापार के 35% से अधिक हिस्से को नियंत्रित करता है।" - फरीआ अल-मुस्लिमी, चैथम हाउस।

लाल सागर में शिपिंग पहले से ही हूती मिसाइलों और ड्रोन हमलों के प्रति संवेदनशील रही है। यदि हूतियों ने पेरिम जैसे महत्वपूर्ण द्वीपों पर नियंत्रण कर लिया है, तो उनकी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में हस्तक्षेप करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह सीधे तौर पर स्वेज नहर की ओर जाने वाले व्यापार को खतरे में डालता है।

दूसरी ओर, अमेरिका एक कठिन स्थिति में है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हस्तक्षेप की अपील की है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह राजनीतिक रूप से जोखिम भरा है। तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल तक पहुँच रही हैं और अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनाव हैं, ऐसे में एक नया युद्ध मोर्चा खोलना उनकी लोकप्रियता को नुकसान पहुँचा सकता है।

तनाव तब और बढ़ गया जब सऊदी अरब की 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' पर ड्रोन हमलों की खबरें आईं। यह पाइपलाइन तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है। इससे स्पष्ट होता है कि ईरान अपने यमनी सहयोगियों के माध्यम से सऊदी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

क्या आप जानते हैं?: बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के नाम का अर्थ है "आंसुओं का द्वार", जो इसके संघर्षपूर्ण इतिहास और वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: इससे वैश्विक तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: बाब अल-मंडेब पर नियंत्रण का मतलब है कि ईरान और हूती दुनिया की तेल आपूर्ति को बाधित कर सकते हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ती है और कीमतें ऊपर जाती हैं।

प्रश्न: अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप क्यों नहीं कर रहा है?
उत्तर: अमेरिका सऊदी अरब की मदद करना चाहता है, लेकिन वह घरेलू राजनीति, चुनाव और तेल की कीमतों में और अधिक वृद्धि के जोखिम से बचना चाहता है।