राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली पहुंचे हैं, जहाँ भारत की रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और ब्रिक्स ढांचे पर महत्वपूर्ण चर्चा होगी।
- कच्चे तेल के व्यापार के माध्यम से ऊर्जा संबंधों को और मजबूत करना।
- उच्च-स्तरीय रक्षा हार्डवेयर और परमाणु संचालित पनडुब्बियों पर निरंतर सहयोग।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक के माध्यम से स्थानीय मुद्रा बॉन्ड जारी करने पर रणनीतिक ध्यान।
भारत मंडपम में भारत और रूस के बीच होने वाली उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक से पहले, विशेषज्ञों के एक पैनल ने प्रमुख राजनयिक, आर्थिक और रणनीतिक आयामों का विश्लेषण किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर हैं।
जर्मनी के पूर्व राजदूत गुरजीत सिंह ने ऊर्जा निर्भरता के समीकरणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में 'केवल तेल व्यापार ही वह कारक है जो बड़ा अंतर पैदा कर रहा है'। उन्होंने ईरानी तेल आपूर्ति में होने वाले व्यवधानों पर राजनयिक चर्चा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया ताकि ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।
रक्षा क्षेत्र हमेशा से भारत-रूस संबंधों का आधार रहा है। संदीप उन्नीथन ने दशकों के द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का मूल्यांकन करते हुए संयुक्त हार्डवेयर अधिग्रहण और परमाणु संचालित हमलावर पनडुब्बियों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर भी चर्चा की कि अमेरिकी दबाव के बीच कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल को पार करने से अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह शिखर सम्मेलन केवल व्यापार के बारे में नहीं है, बल्कि यह भारत की "रणनीतिक स्वायत्तता" (Strategic Autonomy) को बनाए रखने की कोशिश है। रूस के साथ संबंधों को मजबूत कर भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि उसकी विदेश नीति किसी एक वैश्विक शक्ति द्वारा निर्देशित नहीं है।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार की ओर बढ़ना ही भारत-रूस व्यापार को अमेरिकी डॉलर की अस्थिरता से बचाने का एकमात्र तरीका है।
प्रोफेसर दीपांशु मोहन ने ब्रिक्स (BRICS) ढांचे और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि स्थानीय मुद्रा में बॉन्ड जारी करना और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा देना भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कदम पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर निर्भरता को कम करने में मदद करेगा।
इसके अलावा, एमएसएमई (MSMEs) और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास पर भी चर्चा की जाएगी। वैश्विक व्यापार युद्धों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लचीला बनाने के लिए यह विविधीकरण आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारत के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक क्यों महत्वपूर्ण है?
यह आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक का एक विकल्प प्रदान करता है, जिससे भारत को स्थानीय मुद्राओं में वित्त पोषण प्राप्त करने में मदद मिलती है।
प्रश्न 2: अमेरिकी दबाव भारत-रूस तेल व्यापार को कैसे प्रभावित करता है?
अमेरिका प्रतिबंधों के जरिए रूस के साथ व्यापार को हतोत्साहित करता है, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू कीमतों को स्थिर रखने के लिए आयात जारी रखता है।