नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए 30,000 से अधिक प्रतिबंधों की आलोचना की और दावा किया कि रूस की आर्थिक वृद्धि वैश्विक औसत से अधिक रही है।
- रूस पर दुनिया के अन्य सभी देशों की तुलना में दोगुने (30,000+) प्रतिबंध लगाए गए हैं।
- पुतिन का दावा है कि रूस की आर्थिक वृद्धि पिछले तीन वर्षों में वैश्विक औसत से अधिक रही है।
- भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पश्चिमी देशों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम ने रूस पर 30,000 से अधिक प्रतिबंध लगा दिए हैं, जो दुनिया के अन्य सभी देशों पर लगाए गए कुल प्रतिबंधों की तुलना में दोगुने से भी अधिक हैं। पुतिन ने इन प्रतिबंधों को 'अनुचित' और 'कुरूप' तरीके करार दिया, जिनका उद्देश्य केवल रूस की आर्थिक स्थिति को कमजोर करना है।
पुतिन ने जोर देकर कहा कि इन भारी प्रतिबंधों के बावजूद, रूस की अर्थव्यवस्था ने पिछले चार वर्षों में महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन किए हैं। उन्होंने दावा किया कि रूस अब पहले से कहीं अधिक लचीला और अनुकूलन योग्य बन गया है। उनके अनुसार, रूस की आर्थिक वृद्धि दर पिछले तीन वर्षों में वैश्विक औसत को पीछे छोड़ चुकी है, जो यह दर्शाता है कि पश्चिमी दबाव विफल रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पुतिन का यह बयान केवल आर्थिक आंकड़ों के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक रणनीतिक संदेश है। रूस यह दिखाना चाहता है कि वह पश्चिमी अलगाव के बावजूद जीवित नहीं, बल्कि फल-फूल रहा है। विशेष रूप से भारत जैसे देशों के साथ संबंधों को मजबूत करना रूस की 'पिवट टू एशिया' (Pivot to Asia) रणनीति का हिस्सा है, जिससे वह डॉलर-आधारित वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती दे सके।
पुतिन ने अमेरिका द्वारा हाल ही में पारित 'लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' का भी परोक्ष रूप से विरोध किया। इस कानून के तहत रूसी अधिकारियों, कुलीन वर्ग (ओलिगार्क्स) और वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ तथाकथित 'शैडो फ्लीट' को लक्षित किया गया है। पुतिन ने उन 'द्वितीयक प्रतिबंधों' (Secondary Sanctions) की निंदा की, जो उन देशों को डराने के लिए उपयोग किए जाते हैं जो रूस के साथ अपने आर्थिक हितों को बनाए रखना चाहते हैं।
"रूस अब पश्चिमी वित्तीय प्रणालियों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और वैकल्पिक भुगतान तंत्रों की ओर बढ़ रहा है, जो वैश्विक व्यापार के ढांचे को बदल सकता है।"
इस दौरे के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, रक्षा और पश्चिम एशिया व काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों पर चर्चा की। भारत ने स्पष्ट किया कि वह संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति चाहता है। ऊर्जा क्षेत्र में भारत-रूस संबंध और गहरे हुए हैं, जहाँ जुलाई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 51 प्रतिशत तक पहुँच गई।
| विवरण | 2024-25 की स्थिति | 2030 का लक्ष्य |
|---|---|---|
| द्विपक्षीय व्यापार (USD) | ~70 बिलियन | 100 बिलियन |
| मुख्य क्षेत्र | कच्चा तेल, रक्षा | AI, अंतरिक्ष, परमाणु विज्ञान |
दोनों नेताओं ने एक औद्योगिक प्रदर्शनी का भी दौरा किया, जहाँ रूस की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, विमानन और परमाणु विज्ञान में क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तमिल साहित्य की महान कृति 'तिरुक्कुरल' का रूसी अनुवाद भेंट किया, जो सांस्कृतिक कूटनीति के एक नए अध्याय को दर्शाता है।
Frequently Asked Questions
1. रूस पर कितने प्रतिबंध लगाए गए हैं?
राष्ट्रपति पुतिन के अनुसार, रूस पर 30,000 से अधिक प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो दुनिया के अन्य सभी देशों पर लगाए गए कुल प्रतिबंधों से दोगुने हैं।
2. भारत और रूस के बीच व्यापार का लक्ष्य क्या है?
दोनों देशों ने 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।