रूस ने यूक्रेन के पूर्वी डोनबास क्षेत्र में स्लोवियांस्क और क्रामाटोरस्क जैसे रणनीतिक शहरों को निशाना बनाना तेज कर दिया है। भीषण ग्लाइड बम हमलों और ड्रोन हमलों के बीच नागरिक आबादी को जबरन निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
- स्लोवियांस्क और क्रामाटोरस्क पर रूसी हमलों में भारी वृद्धि, अब लगभग प्रतिदिन ग्लाइड बम गिर रहे हैं।
- यूक्रेन के 'फोर्ट्रेस बेल्ट' का हिस्सा कोस्त्यांतनिव्का अब गंभीर खतरे में है।
- रूस का लक्ष्य साल के अंत तक पूरे डोनबास (डोनेट्स्क और लुहान्स्क) पर कब्जा करना है।
यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में स्थित स्लोवियांस्क और क्रामाटोरस्क इस समय युद्ध के सबसे खतरनाक केंद्रों में बदल चुके हैं। स्थानीय पुलिस ने नागरिकों के लिए इन शहरों को तुरंत खाली करने की चेतावनी जारी की है। ये शहर डोनबास क्षेत्र में यूक्रेन के नियंत्रण वाले सबसे बड़े शहरी केंद्र हैं और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। डोनेट्स्क पुलिस के पावलो ड्याचेंको के अनुसार, बच्चों वाले परिवारों की जबरन निकासी शुरू हो चुकी है क्योंकि सुरक्षा स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।
इन शहरों को यूक्रेन की 'फोर्ट्रेस बेल्ट' (किला पट्टी) कहा जाता है, जो पूर्व में भारी रूप से सुदृढ़ रक्षा पंक्तियों का एक तंत्र है। हालांकि, हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि कोस्त्यांतनिव्का में यूक्रेनी सैनिकों की उपस्थिति सीमित रह गई है, जबकि रूस ने इस क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है। यदि रूस इन शहरों को जीतने में सफल रहता है, तो पश्चिम की ओर उसकी बढ़त बहुत आसान हो जाएगी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, डोनबास का पूर्ण कब्जा पुतिन के लिए केवल एक सैन्य लक्ष्य नहीं, बल्कि एक राजनीतिक आवश्यकता है। रूस ने आक्रमण के समय से ही रूसी भाषी आबादी की 'मुक्ति' का तर्क दिया है। वर्तमान में रूस लुहान्स्क के लगभग पूरे क्षेत्र और डोनेट्स्क के करीब 80% हिस्से पर नियंत्रण रखता है। इन अंतिम किलों का गिरना यूक्रेन की रक्षा पंक्ति में एक बड़ा छेद कर सकता है।
"ग्लाइड बम अब सबसे बड़ा डर बन चुके हैं; वे खामोश हत्यारे हैं जो पलक झपकते ही पूरी इमारतों को मलबे में बदल देते हैं।"
आंकड़ों के अनुसार, रूसी हमलों की तीव्रता में डरावनी वृद्धि हुई है। जून में जहां 70 नागरिक घायल हुए थे, वहीं अगस्त तक यह संख्या बढ़कर 212 हो गई। विशेष रूप से ग्लाइड बमों का उपयोग बढ़ा है, जिनकी संख्या जून में 40 से बढ़कर जुलाई में 109 तक पहुंच गई। ये बम 250 किलो से 1,500 किलो तक के हो सकते हैं और अपनी विंगलेट्स के कारण सटीक लक्ष्य पर प्रहार करते हैं।
युद्ध क्षेत्र की स्थिति इतनी भयावह है कि सड़कों पर एंटी-ड्रोन जाल लगाए गए हैं। स्वयंसेवकों का कहना है कि FPV ड्रोन अब हर समय हवा में मंडराते रहते हैं, जिससे शहर के भीतर आवाजाही जानलेवा हो गई है। बुनियादी ढांचे और आवासीय ब्लॉकों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है ताकि नागरिक मनोबल को तोड़ा जा सके।
राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इन क्षेत्रों को बचाने के लिए जनरल एंड्री बिलेट्सकी और डेनिस प्रोकोपेनको के नेतृत्व में दो नए टास्क फोर्स बनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पुतिन ने अपने जनरलों को साल के अंत तक डोनबास पर पूर्ण कब्जा करने का समय दिया है।
| माह (2026) | घायल नागरिक | ग्लाइड बम हमले |
|---|---|---|
| जून | 70 | 40 |
| जुलाई | - | 109 |
| अगस्त | 212 | 92 |
Frequently Asked Questions
1. ग्लाइड बम क्या होते हैं और वे इतने खतरनाक क्यों हैं?
ग्लाइड बम ऐसे हथियार हैं जिनमें छोटे पंख (winglets) लगे होते हैं, जिससे वे सीधे गिरने के बजाय हवा में ग्लाइड कर सकते हैं। यह उन्हें अधिक सटीक और विनाशकारी बनाता है।
2. यूक्रेन के लिए डोनबास क्षेत्र का क्या महत्व है?
डोनबास क्षेत्र औद्योगिक रूप से समृद्ध है और यूक्रेन की संप्रभुता का प्रतीक है। इसका नुकसान रूस को रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाएगा।