भारत की राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई है, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता और ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद करने पर मुख्य ध्यान है।
- भारत मंडपम, नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एलएसी (LAC) और व्यापार पर महत्वपूर्ण बैठक।
- भारत-इथियोपिया द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, खनिज और स्वास्थ्य सहयोग पर चर्चा।
- सुरक्षा के लिए 25,000 कर्मियों का व्यापक सुरक्षा घेरा तैनात।
भारत की राजधानी नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ है। इस सम्मेलन के माध्यम से भारत ने एक बार फिर खुद को 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की एक सशक्त आवाज के रूप में स्थापित किया है। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की भागीदारी को बढ़ाना है।
सम्मेलन की शुरुआत बंद कमरे में आयोजित उच्च स्तरीय सत्रों से हुई, जिसमें सदस्य देशों के नेताओं ने वैश्विक शासन, आर्थिक लचीलेपन, नवाचार और आतंकवाद विरोधी एकजुटता पर गहन चर्चा की। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़ी क्षेत्रीय तनावपूर्ण स्थितियों पर चिंता व्यक्त की गई और शांति की अपील की गई।
द्विपक्षीय वार्ता और रणनीतिक संबंध
शिखर सम्मेलन के औपचारिक सत्रों से पहले कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं। इनमें सबसे अधिक ध्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली मुलाकात पर है। इस वार्ता का मुख्य केंद्र व्यापारिक संबंध, विकास साझेदारी और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना है।
इसके साथ ही, भारत और इथियोपिया के बीच भी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय चर्चा हुई। इस वार्ता में रक्षा क्षमता निर्माण, निवेश संबंधों, महत्वपूर्ण खनिजों, स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अफ्रीका और ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाने की प्रतिबद्धता जताई, विशेष रूप से वैश्विक संघर्षों के कारण विकासशील देशों को होने वाले नुकसानों पर चर्चा की गई।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन केवल एक राजनयिक बैठक नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने का एक प्रयास है। भारत का ग्लोबल साउथ के नेतृत्व की कोशिश करना यह दर्शाता है कि वह अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि एक वैश्विक मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात एशिया की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
"ब्रिक्स का यह सम्मेलन बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर एक बड़ा कदम है, जहाँ विकासशील देशों की आर्थिक और राजनीतिक संप्रभुता को प्राथमिकता दी जाएगी।"
सुरक्षा के लिहाज से, दिल्ली को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजधानी में 25,000 सुरक्षा कर्मियों, SWAT टीमों, स्नाइपर्स और अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों का जाल बिछाया गया है ताकि दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य समावेशी वैश्विक शासन को बढ़ावा देना, ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना और आर्थिक लचीलेपन तथा आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता बढ़ाना है।
प्रश्न 2: भारत-चीन वार्ता के मुख्य बिंदु क्या हैं?
उत्तर: मुख्य चर्चा व्यापार, विकास साझेदारी और LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) पर शांति बनाए रखने पर केंद्रित है।