भारत में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में नेताओं ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की और यूक्रेन‑रूस तथा इज़राइल‑हामास के बीच चल रहे दो संघर्षों के बीच वैश्विक व्यापार को सुगम बनाने का आह्वान किया। इस घोषणा में अमेरिका की नीतियों की भी आलोचना की गई।

  • BRICS ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के खिलाफ "शून्य सहनशीलता" का इशारा किया।
  • संयुक्त घोषणा में दो मौजूदा युद्धों के बीच वैश्विक व्यापार के मुक्त प्रवाह की मांग की गई।
  • भारत की स्थिति में बदलाव का संकेत मिला, जो अब BRICS के साथ अधिक संरेखित दिख रहा है।

शिखर सम्मेलन का संदर्भ

भारत में आयोजित इस वर्ष के BRICS शिखर सम्मेलन में 15 देशों के प्रमुख उपस्थित थे। यह बैठक दो बड़े संघर्षों—रूस‑यूक्रेन और इज़राइल‑हामास—के बीच आयोजित हो रही थी, जिससे वैश्विक आर्थिक तंत्र पर दबाव बढ़ रहा था।

संयुक्त घोषणा के मुख्य बिंदु

समिति ने एक व्यापक घोषणा जारी की, जिसमें पहलगाम (जम्मू‑कश्मीर) में हुए आतंकवादी हमले की "शून्य सहनशीलता" पर ज़ोर दिया गया। साथ ही, पश्चिमी एशिया में अधिकतम संयम रखने और ईरान के साथ आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की अपील की गई। अमेरिकी नीतियों की भी तीखी आलोचना की गई, विशेषकर उन पर जो वैश्विक व्यापार में बाधाएँ उत्पन्न कर रही हैं।

भारत की भूमिका और संभावित बदलाव

परम्परागत रूप से भारत ने अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं, परंतु इस शिखर सम्मेलन में उसने BRICS के साथ अधिक सहयोगी रुख अपनाया। यह संकेत देता है कि भारत अपने विदेश नीति में संतुलन बनाते हुए दोनों महाशक्तियों के बीच मध्यम मार्ग खोज रहा है।

Historical Background

BRICS समूह की स्थापना 2009 में हुई थी, जिसका मूल उद्देश्य विकासशील देशों के बीच आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करना था। पहले के सम्मेलनों में अक्सर व्यापार बाधाओं को कम करने, वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों की स्थापना और विकासशील देशों के हितों की रक्षा पर जोर दिया गया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि इस घोषणा का प्रभाव न केवल सदस्य देशों तक सीमित रहेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा कीमतों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह पर भी गहरा असर पड़ेगा। यदि BRICS के प्रमुख देशों द्वारा व्यापार बाधाओं को हटाया जाता है, तो यह अमेरिका‑यूरोपीय संघ के मौजूदा आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है।

"BRICS की इस नई दिशा से वैश्विक व्यापार का पुनर्संतुलन संभव है, लेकिन इसके लिए सभी सदस्य देशों की सच्ची प्रतिबद्धता आवश्यक है," कहा अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. रवीना सिंह ने।
Did You Know?: 2022 में BRICS ने पहली बार अपनी वैकल्पिक भुगतान प्रणाली "BRICS Pay" का प्रोटोटाइप लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य रूढ़िवादी स्वैप्स को कम करना है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या इस घोषणा से भारत-यूएस संबंधों पर असर पड़ेगा?
A1: संभावित रूप से, यदि भारत अधिक सक्रिय रूप से BRICS के आर्थिक ढांचे में शामिल होता है, तो द्विपक्षीय व्यापार नीति में समायोजन की आवश्यकता हो सकती है।

Q2: पहलगाम हमले की कड़ी निंदा का क्या व्यावहारिक प्रभाव होगा?
A2: यह कदम आतंकवादी संगठनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने और उनके वित्तीय स्रोतों को कटौती करने में मदद कर सकता है।