ब्रिक्स ने नई दिल्ली घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी दी, जिसमें पहलगाम हमले की निंदा, भारत की यूएनएससी सदस्यता की मांग, टैरिफ विरोध और डिजिटल‑वित्तीय सहयोग शामिल हैं। यह दस्तावेज़ समूह के वैश्विक भूमिका को पुनः परिभाषित करने की कोशिश को दर्शाता है।

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  • पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा
  • भारत की यूएनएससी सदस्यता का समर्थन
  • एकतरफ़ा टैरिफ और प्रतिबंधों का विरोध

नई दिल्ली घोषणा का सार

शनिवार को ब्रिक्स देशों ने ‘नई दिल्ली घोषणा पत्र’ को बिना किसी सदस्य के विरोध के पारित किया। भारत ने इस दस्तावेज़ में पहलगाम हमले को प्रमुख मुद्दा बनाकर आतंकवाद के खिलाफ ‘ज़ीरो‑टॉलरेंस’ की मांग रखी। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की संभावित सदस्यता, एकतरफ़ा व्यापार बाधाओं का विरोध और डिजिटल‑वित्तीय सहयोग को भी प्रमुख बिंदु बनाया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) की पहली घोषणा 2009 में हुई थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों का वजन बढ़ाना है। 2023 में भारत ने समूह की अध्यक्षता संभाली, और इस बार नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन ने समूह के एजेंडा को सुरक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग की ओर विस्तारित किया।

मुख्य बिंदु

पहलगाम हमले – 2022 में जम्मू‑कश्मीर में हुए इस आतंकवादी हमले के 26 शहीदों को ‘कड़े से कड़े शब्दों’ में निंदा किया गया। घोषणा पत्र में सीमा‑पार आतंकवादी आवाज़ाही, फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

UNSC में भारत की सदस्यता – भारत की स्थायी सदस्यता की संभावनाओं को लेकर ब्रिक्स ने चीन‑रूस के समर्थन को स्पष्ट किया, जिससे भारत की अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भूमिका मजबूत होगी।

टैरिफ वॉर – अमेरिकी-प्रेरित एकतरफ़ा टैरिफ और नॉन‑टैरिफ़ बाधाओं की निंदा की गई, साथ ही विकास, खाद्य सुरक्षा और मानवाधिकारों पर इनके नकारात्मक प्रभावों को उजागर किया गया।

परमाणु जोखिम – ईरान के परमाणु स्थलों पर संभावित हमलों और वैश्विक हथियार‑नियंत्रण ढाँचे के बिगड़ने को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गईं।

ग्लोबल साउथ – अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में विकासशील देशों की आवाज़ बढ़ाने, IMF और विश्व बैंक में वोटिंग पावर सुधारने की मांग की गई।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the unanimous adoption of the Delhi declaration marks a diplomatic milestone for India, positioning it as a bridge between the Global South and established powers, while simultaneously challenging Western‑led trade regimes.

“ब्रिक्स का यह कदम न केवल भारत की अंतर्राष्ट्रीय आकांक्षाओं को साकार करता है, बल्कि वैश्विक व्यापार और सुरक्षा ढाँचे में संतुलन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।” – अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर डॉ. अनीता शर्मा
Did You Know?: ब्रिक्स समूह का पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुआ था, और तब से सदस्य संख्या 5 से 11 तक बढ़ गई है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या भारत को UNSC में स्थायी सदस्यता मिलने की संभावना है?
A: वर्तमान में ब्रिक्स ने भारत की संभावित सदस्यता के लिए चीन‑रूस के समर्थन को व्यक्त किया है, लेकिन औपचारिक प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं।

Q2: ब्रिक्स का टैरिफ विरोध किस दिशा में जा रहा है?
A: समूह ने सभी प्रकार के एकतरफ़ा टैरिफ और नॉन‑टैरिफ़ बाधाओं को समाप्त करने की मांग की है, जिससे विकासशील देशों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।