नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच भारत की बढ़ती वैश्विक साख और विपक्षी आलोचनाओं पर एक विस्तृत विश्लेषण। जानिए कैसे भारत दुनिया के नए भू-राजनीतिक समीकरणों को संतुलित कर रहा है।
- BRICS अब दुनिया की 50% जनसंख्या और 40% वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है।
- भारत ने G20 की तरह ही BRICS में भी विवादित देशों के बीच सेतु का काम किया है।
- शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता (RICS) को बढ़ावा देना है।
नई दिल्ली में आयोजित 18वां BRICS शिखर सम्मेलन केवल एक राजनयिक बैठक नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था का प्रतिबिंब है। जहाँ एक ओर विपक्षी नेता पी. चिदंबरम जैसे दिग्गज इस समूह की उपयोगिता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि BRICS अब 'ग्लोबल साउथ' की सबसे सशक्त आवाज बन चुका है। भारत ने इस मंच का उपयोग अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने के लिए किया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो BRICS का प्रभाव G7 की तुलना में काफी अधिक हो गया है। वर्तमान में इस समूह में 11 पूर्ण सदस्य और 10 भागीदार देश शामिल हैं। यह संगठन वैश्विक व्यापार के 26% हिस्से को नियंत्रित करता है, जो इसे आर्थिक रूप से एक महाशक्ति बनाता है। भारत ने जनवरी में चौथी बार इसकी अध्यक्षता संभाली, जिसके तहत अब तक 350 से अधिक उच्च-स्तरीय बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि अमेरिका द्वारा अपनी वैश्विक भूमिका से पीछे हटने के बाद, भारत एक 'बैलेंसिंग पावर' के रूप में उभरा है। भारत न केवल पश्चिम के साथ अपने संबंधों को बनाए हुए है, बल्कि रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के साथ भी संवाद के रास्ते खुले रखे हुए है। यह क्षमता भारत को वैश्विक संकटों के समय एक अनिवार्य मध्यस्थ बनाती है।
"वर्तमान वैश्विक व्यवस्था एक ऐसे संक्रमण काल से गुजर रही है जहाँ पुराने नियम टूट चुके हैं और नए नियम अभी बनने बाकी हैं, जिससे भारत जैसे देशों के लिए नेतृत्व का अवसर पैदा हुआ है।"
इस वर्ष के सम्मेलन का विषय 'Building Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' रखा गया है। यह विषय आज के दौर की तीन सबसे बड़ी चुनौतियों—आर्थिक अस्थिरता, तकनीकी विभाजन (AI और सेमीकंडक्टर्स) और जलवायु परिवर्तन—को संबोधित करता है। भारत का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक का लाभ केवल कुछ विकसित देशों तक सीमित न रहे।
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने 2012 (UPA शासन), 2016 और 2021 (NDA शासन) में इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी की है। 2016 में मोदी सरकार ने BIMSTEC देशों को जोड़कर इसे और व्यापक बनाया था। इस बार का दिल्ली सम्मेलन पिछले सभी रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए सबसे अधिक राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी देख रहा है।
वर्तमान में यह सम्मेलन अमेरिका-ईरान संघर्ष की छाया में हो रहा है, जिसने सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों को भी प्रभावित किया है। ऐसे में भारत की तटस्थ छवि और पीएम मोदी की व्यक्तिगत केमिस्ट्री इन देशों के बीच तनाव कम करने और एक सर्वसम्मत घोषणापत्र तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
| विशेषता | BRICS | G7 |
|---|---|---|
| जनसंख्या प्रतिनिधित्व | ~50% | <10% |
| वैश्विक जीडीपी | ~40% | ~44% |
| मुख्य फोकस | ग्लोबल साउथ, विकास | विकसित अर्थव्यवस्थाएं, सुरक्षा |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: BRICS भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह भारत को ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करने और अमेरिका-चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों के बीच संतुलन बनाने का अवसर देता है।
प्रश्न 2: इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य नवाचार, स्थिरता और आर्थिक लचीलापन बढ़ाना है ताकि विकासशील देश तकनीकी विभाजन को कम कर सकें।