BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीर ने वैश्विक कूटनीति में नए समीकरणों का संकेत दिया है। नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 की मंजूरी के साथ ही ब्रिक्स ने ग्लोबल साउथ की आवाज को और मजबूत किया है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन और जिनपिंग के साथ वैश्विक सहयोग का संदेश दिया।
  • ब्रिक्स देशों ने 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
  • आतंकवाद और युद्ध के खिलाफ ब्रिक्स का कड़ा रुख स्पष्ट किया गया।

ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ मौजूदगी ने वैश्विक शक्ति संतुलन की ओर इशारा किया है। यह दृश्य न केवल ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ती निकटता को दर्शाता है, बल्कि पश्चिमी प्रभुत्व वाले मौजूदा विश्व क्रम के लिए एक नई चुनौती भी पेश करता है।

इस सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' की सर्वसम्मत मंजूरी रहा। इस घोषणापत्र में आतंकवाद, व्यापारिक बाधाओं और वैश्विक संघर्षों पर गंभीर चर्चा की गई। विशेष रूप से, पहलगाम हमले जैसी आतंकवादी घटनाओं की कड़ी निंदा की गई, जो यह दर्शाता है कि ब्रिक्स अब सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर एक साझा मंच के रूप में उभर रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स का यह विस्तार केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'ग्लोबल साउथ' (Global South) के नेतृत्व की एक बड़ी कोशिश है। जब मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक मंच पर होते हैं, तो यह संदेश जाता है कि विकासशील देश अब अपनी शर्तों पर वैश्विक एजेंडा तय करने के लिए तैयार हैं।

ब्रिक्स का यह नया स्वरूप वैश्विक राजनीति में बहुध्रुवीयता (Multipolarity) की ओर एक निर्णायक कदम है।

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने 'ग्लोबल साउथ' के हितों की रक्षा करने पर जोर दिया। उन्होंने व्यापारिक टैरिफ और युद्ध के कारण उत्पन्न होने वाली आर्थिक अस्थिरता पर भी चिंता व्यक्त की। यह स्पष्ट है कि ब्रिक्स अब एक ऐसा ब्लॉक बनाने की दिशा में बढ़ रहा है जो पश्चिमी प्रतिबंधों और आर्थिक दबावों का मुकाबला कर सके।

ऐतिहासिक रूप से, ब्रिक्स का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक मंच देने के लिए किया गया था, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें भू-राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन-अमेरिका तनाव के बीच, ब्रिक्स की यह एकजुटता वैश्विक कूटनीति के लिए एक नया अध्याय है।

Did You Know?: ब्रिक्स (BRICS) शब्द का उपयोग पहली बार 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील द्वारा किया गया था।

Frequently Asked Questions

1. नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 क्या है?
यह ब्रिक्स देशों द्वारा स्वीकृत एक साझा रोडमैप है जो आतंकवाद, व्यापार और वैश्विक सहयोग के मुद्दों पर केंद्रित है।

2. इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना और आर्थिक व राजनीतिक स्थिरता के लिए साझा मंच तैयार करना था।