नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन का 45 पन्नों का घोषणापत्र वैश्विक भू-राजनीति में एक नए संतुलन का संकेत देता है। यूक्रेन युद्ध पर चुप्पी और अमेरिकी व्यापार नीतियों पर तीखे कटाक्ष के बीच, यह दस्तावेज ग्लोबल साउथ की नई आवाज बनकर उभरा है।
- यूक्रेन युद्ध का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे रूस के साथ राजनयिक संतुलन बना रहा।
- अमेरिकी 'एकतरफा प्रतिबंधों' और टैरिफ नीतियों की अप्रत्यक्ष रूप से कड़ी आलोचना की गई।
- गाजा संघर्ष और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर स्पष्ट रुख अपनाया गया।
- चीन ने अफ्रीकी देशों के लिए शून्य-टैरिफ नीति का उल्लेख कर खुद को ग्लोबल साउथ के मसीहा के रूप में पेश किया।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन 2026 का 45 पन्नों का व्यापक घोषणापत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने का एक सूक्ष्म राजनयिक प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणापत्र को अत्यंत सावधानी से तैयार किया गया है ताकि सदस्य देशों के बीच के मतभेदों को दबाकर एक साझा एजेंडे पर सहमति बनाई जा सके।
इस घोषणापत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी 'चुप्पी' है। जहाँ 2025 के रियो घोषणापत्र में यूक्रेन संघर्ष का उल्लेख था, वहीं दिल्ली घोषणापत्र में यूक्रेन या रूस के आक्रमण का कोई जिक्र नहीं किया गया। यह भारत की उस कूटनीतिक कुशलता को दर्शाता है जिसके जरिए उसने रूस के साथ अपने संबंधों को सुरक्षित रखते हुए शिखर सम्मेलन को सफल बनाया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि BRICS अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने वाला एक भू-राजनीतिक मोर्चा बन रहा है। घोषणापत्र में 'एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों' और 'टैरिफ' का बार-बार उल्लेख सीधे तौर पर अमेरिका की व्यापार नीतियों पर प्रहार है।
BRICS अब पश्चिमी प्रतिबंधों के खिलाफ एक सामूहिक ढाल के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है।
घोषणापत्र का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू UNSC सुधार है। इसमें चीन और रूस ने भारत और ब्राजील की संयुक्त सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं का समर्थन किया है। यह दर्शाता है कि ब्रिक्स के भीतर कुछ देशों के बीच एक रणनीतिक तालमेल विकसित हो रहा है।
आतंकवाद के मुद्दे पर, समूह ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही, ईरान और यूएई के बीच के जटिल संबंधों को संतुलित करते हुए, ईरान की विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शामिल होने की इच्छा का समर्थन किया गया है।
Frequently Asked Questions
1. क्या BRICS ने यूक्रेन युद्ध पर कोई रुख अपनाया है?
नहीं, दिल्ली घोषणापत्र में यूक्रेन युद्ध या रूस के आक्रमण का कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया है।
2. अमेरिका के खिलाफ BRICS का क्या रुख है?
घोषणापत्र में 'एकतरफा प्रतिबंधों' और 'बढ़ते टैरिफ' की आलोचना की गई है, जो स्पष्ट रूप से अमेरिकी आर्थिक नीतियों की ओर इशारा करता है।