ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और उनकी बेटी ज़हरा का भारत में भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू के साथ द्विपक्षीय वार्ता से लेकर ब्रिक्स बाज़ार में सांस्कृतिक भ्रमण तक, यह यात्रा भारत-ईरान संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की राष्ट्रपति भवन में मेजबानी की।
- पेज़ेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।
- राष्ट्रपति की बेटी ज़हरा पेज़ेशकियन ने ब्रिक्स बाज़ार का दौरा किया और भारतीय संस्कृति का अनुभव किया।
- यह यात्रा पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष के बीच भारत की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित करती है।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच, भारत ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और उनकी बेटी ज़हरा पेज़ेशकियन के लिए रेड कार्पेट बिछाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में विशेष रूप से आमंत्रित किया, जो इस शिखर सम्मेलन के दौरान किसी भी अन्य राष्ट्राध्यक्ष के लिए किया गया एकमात्र विशेष प्रोटोकॉल था।
पेज़ेशकियन की यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध भी शामिल थे। राष्ट्रपति भवन के दौरे के दौरान, उन्होंने 'ईरानी हॉल' (अशोक मंडप) का भ्रमण किया, जहाँ क़जार युग की प्रसिद्ध फारसी कलाकृतियाँ प्रदर्शित हैं। यह कलाकृतियाँ 1797 से 1834 के बीच फ़थ-अली शाह क़जार के शासनकाल की याद दिलाती हैं, जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों का प्रतीक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, भारत द्वारा पेज़ेशकियन को दिया गया यह विशेष सम्मान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश है। भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' को बनाए रखते हुए ईरान जैसे महत्वपूर्ण सभ्यतागत साझेदार के साथ अपने संबंधों को और गहरा कर रहा है।
भारत का यह कदम वैश्विक भू-राजनीति में एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उसकी उभरती भूमिका को दर्शाता है।
सांस्कृतिक कूटनीति का एक शानदार उदाहरण तब देखने को मिला जब केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने राष्ट्रपति की बेटी ज़हरा पेज़ेशकियन को ब्रिक्स बाज़ार में ले जाकर भारतीय हस्तशिल्प और परंपराओं से परिचित कराया। यह बाज़ार भारत के राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में आयोजित किया गया था, जहाँ ब्रिक्स देशों के कारीगरों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: भारत और ईरान के संबंध प्राचीन रेशम मार्ग (Silk Road) के समय से हैं। क़जार राजवंश के दौरान भी दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान चरम पर था। वर्तमान में, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के मामले में ईरान भारत के लिए एक अनिवार्य भागीदार बना हुआ है।
पेज़ेशकियन ने अपनी यात्रा के दौरान स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव या उत्पीड़न के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने भारत और ईरान के बीच 'लोगों से लोगों के जुड़ाव' (people-to-people ties) को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पेज़ेशकियन की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेना और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों, विशेष रूप से व्यापार और संस्कृति को मजबूत करना था।
प्रश्न 2: ब्रिक्स बाज़ार क्या है?
उत्तर: यह ब्रिक्स देशों के कारीगरों द्वारा आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करना है।