ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आजतक के साथ एक विशेष साक्षात्कार में भारत के साथ मजबूत संबंधों, चाबहार पोर्ट की क्षमता और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव पर महत्वपूर्ण बयान दिए हैं।

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  • प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर गहन चर्चा हुई।
  • चाबहार पोर्ट को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया गया।
  • ईरान ने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को 'तानाशाही' करार देते हुए ब्रिक्स (BRICS) की भूमिका पर जोर दिया।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत की यात्रा के बीच एक विशेष साक्षात्कार में वैश्विक भू-राजनीति और भारत के साथ ईरान के रणनीतिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। इंडिया टुडे ग्रुप की फॉरेन अफेयर्स एडिटर गीता मोहन के साथ हुई इस बातचीत में राष्ट्रपति ने न केवल द्विपक्षीय सहयोग पर प्रकाश डाला, बल्कि अमेरिका के साथ चल रहे तनावपूर्ण संबंधों पर भी कड़ा रुख अपनाया।

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात को अत्यंत सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि हजारों साल पुराने सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर दुनिया में बढ़ती तानाशाही का मुकाबला करने के लिए एक नया ढांचा तैयार कर सकते हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि ईरान और भारत के बीच चाबहार पोर्ट का विकास केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह मध्य एशिया और यूरोप तक पहुँचने के लिए भारत के रणनीतिक स्वायत्तता का एक बड़ा हिस्सा है। ईरान की स्थिरता और भारत के साथ उसके संबंध दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

चाबहार पोर्ट के महत्व पर बात करते हुए, राष्ट्रपति ने भारतीय निवेशकों को भरोसा दिलाया कि ईरान एक प्रमुख भू-राजनीतिक चौराहे पर स्थित है। उन्होंने कहा कि ईरान 'सिल्क रूट' का एक ऐतिहासिक हिस्सा रहा है और अब वह इस मार्ग को फिर से जीवंत करने के लिए तैयार है, जिससे व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।

ईरान और भारत के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक साझा ऐतिहासिक विरासत और भविष्य की कनेक्टिविटी का संगम हैं।

अमेरिका के साथ संघर्ष के मुद्दे पर पेजेश्कियान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका बिना किसी उकसावे के ईरान के बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिकों पर हमले कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान केवल आत्मरक्षा कर रहा है। उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों को 'एकतरफा तानाशाही' बताते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) जैसे मंचों का उद्देश्य ही इस प्रकार के आर्थिक दबाव को समाप्त करना है।

Did You Know?: चाबहार पोर्ट भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक पहुंचने का एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है, जो पाकिस्तान के माध्यम से जाने वाले पारंपरिक रास्तों का विकल्प है।

Frequently Asked Questions

1. भारत और ईरान के बीच मुख्य रणनीतिक मुद्दा क्या है?
मुख्य मुद्दा चाबहार पोर्ट का विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी है, जो भारत को मध्य एशिया से जोड़ता है।

2. राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने अमेरिका के बारे में क्या कहा?
उन्होंने अमेरिका पर बिना किसी आधार के ईरान के वैज्ञानिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का आरोप लगाया।