ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इंडिया टुडे को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पश्चिम एशिया के तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण और भारत के साथ रणनीतिक संबंधों पर खुलकर बात की है।
- पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक व्यापार मार्गों पर प्रभाव की चर्चा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों और BRICS की भूमिका पर जोर।
- अमेरिकी प्रतिबंधों और डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने की रणनीति।
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इंडिया टुडे की गीता मोहन को एक विशेष साक्षात्कार दिया है। इस बातचीत में राष्ट्रपति ने उन संवेदनशील मुद्दों को छुआ है जिन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली भारी वृद्धि, जो 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है।
साक्षात्कार के दौरान, राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने संयुक्त राज्य अमेरिका की धमकियों का कड़ा जवाब दिया और क्षेत्रीय ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे के कारणों का विश्लेषण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही वैश्विक व्यापार की स्थिरता के लिए कूटनीतिक रास्ते भी खुले रखना चाहता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ईरान का यह साक्षात्कार ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन का पीएम मोदी के साथ BRICS शिखर सम्मेलन के इतर मिलना यह दर्शाता है कि भारत और ईरान एक-दूसरे के साथ रणनीतिक संतुलन बनाना चाहते हैं, ताकि अमेरिकी एकतरफावाद (unilateralism) का मुकाबला किया जा सके।
"पश्चिम एशिया का वर्तमान संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक चुनौती है जो तेल आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर सकती है।"
BRICS की भूमिका पर चर्चा करते हुए, पेज़ेशकियन ने उल्लेख किया कि यह संगठन अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं, बल्कि एक राजनीतिक शक्ति बन गया है। उन्होंने अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को कम करने और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि प्रतिबंधों के प्रभाव को कम किया जा सके।
ऐतिहासिक रूप से, भारत और ईरान के संबंध चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के कारण गहरे रहे हैं। यह साक्षात्कार संकेत देता है कि नई ईरानी सरकार भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखती है, जो पश्चिम और पूर्व के बीच एक सेतु का काम कर सकता है।
Frequently Asked Questions
1. राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने पीएम मोदी के साथ किन मुद्दों पर चर्चा की?
उन्होंने मुख्य रूप से द्विपक्षीय संबंधों, BRICS की भूमिका और अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को कम करने के तरीकों पर चर्चा की।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है?
इस मार्ग पर किसी भी तरह का व्यवधान कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल लाता है, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ती है।