ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया के तनाव, अमेरिका के साथ संबंधों और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राय रखी।
- भारत और ईरान के बीच हजारों साल पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने पर सहमति।
- पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर सुधार और वैश्विक अधिनायकवाद के खिलाफ एकजुटता।
- पश्चिम एशिया में युद्ध, डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और परमाणु संवर्धन जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के बाद हुई, जिसने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के बीच कूटनीतिक सेतु को और मजबूत किया है। पेज़ेश्कियन ने भारत और ईरान के बीच के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध निरंतर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच केवल राजनीतिक संबंध नहीं हैं, बल्कि यह हजारों वर्षों की सभ्यतागत विरासत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह साझा विरासत दोनों राष्ट्रों को आधुनिक युग के वैश्विक चुनौतियों, विशेष रूप से बढ़ते अधिनायकवाद (Totalitarianism) का सामना करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that Iran's outreach to India is a strategic move to balance its regional isolation. By leveraging the 'civilizational ties' narrative, Tehran seeks to ensure that New Delhi remains a neutral yet supportive partner amidst the escalating conflict between Israel and Iran, and the unpredictable nature of US foreign policy under Donald Trump.
"The convergence of Indian strategic autonomy and Iranian regional ambitions could redefine the security architecture of the Indian Ocean and the Persian Gulf."
साक्षात्कार के दौरान, राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय विषयों पर बात की। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के साथ ईरान के भविष्य के संबंधों, ईरान के सर्वोच्च नेता की स्थिति और देश की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा की। इसके अलावा, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की रणनीतिक स्थिति और अरब जगत के साथ ईरान के कूटनीतिक जुड़ाव पर भी प्रकाश डाला।
परमाणु मुद्दे पर बात करते हुए, उन्होंने ईरान के परमाणु संवर्धन के रुख को स्पष्ट किया और परमाणु हथियारों के प्रति अपनी स्थिति साझा की। यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति तनावपूर्ण है और वैश्विक शक्तियां ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं।
Frequently Asked Questions
1. राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
मुख्य उद्देश्य पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करना था।
2. ईरान ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के बारे में क्या संकेत दिए?
उन्होंने भविष्य के संबंधों और संभावित कूटनीतिक बदलावों पर चर्चा की, जो ट्रंप प्रशासन की वापसी के बाद महत्वपूर्ण होंगे।