नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर प्रगति का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

  • मोदी और शी ने भारत-चीन संबंधों में 'निरंतर प्रगति' पर संतोष व्यक्त किया।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में 'शांति और स्थिरता' को द्विपक्षीय संबंधों का आधार बताया।
  • दोनों नेताओं ने वैश्विक दक्षिण (Global South) के प्रमुख देशों के रूप में अपनी जिम्मेदारी को स्वीकार किया।
  • सीमा विवाद के समाधान के लिए राजनीतिक दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी।

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) के इतर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक उच्च स्तरीय मुलाकात हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली मुलाकात के बाद से भारत-चीन संबंधों में देखी गई 'निरंतर प्रगति' का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में 'शांति और स्थिरता' बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए एक आवश्यक आधार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अपने संबंधों के प्रति एक रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि मतभेद विवादों में न बदलें।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यदि दोनों देश सीमा विवाद को राजनीतिक रूप से हल करने में सफल होते हैं, तो यह न केवल एशिया बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।

सीमावर्ती शांति केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एशिया की आर्थिक और सुरक्षा संरचना की नींव है।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत और चीन को 'ग्लोबल साउथ' के प्रमुख देशों के रूप में वर्णित किया, जिनके पास विश्व मामलों में 'महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां' हैं। उन्होंने चार मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया: तर्कसंगत रणनीतिक समझ, पारस्परिक लाभ के माध्यम से सहयोग, आपसी सम्मान और बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से समावेशिता।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत और चीन के संबंधों में 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद से एक शीत चरण देखा गया था। हालांकि, पिछले दो वर्षों में कैलाश मानसरोवर यात्रा के पुनरुद्धार और सीमावर्ती व्यापार में सुधार ने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने में मदद की है। तियानजिन (2025) और कजान (2024) की बैठकों ने इस सुधार की दिशा में निरंतरता बनाए रखी है।

Did You Know?: कैलाश मानसरोवर यात्रा के पुनरुद्धार ने हिमालयी दर्रों के माध्यम से लोगों के बीच संपर्क और सीमा पार व्यापार को नई गति दी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार का मुख्य आधार क्या है?
सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और मतभेदों को विवादों में बदलने से रोकना मुख्य आधार है।

2. ब्रिक्स (BRICS) की भूमिका इस संदर्भ में क्या है?
ब्रिक्स एक ऐसा मंच है जहाँ भारत और चीन जैसे उभरते बाजार वैश्विक चुनौतियों, जैसे जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकट से निपटने के लिए सहयोग करते हैं।