प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
- भारत और इथियोपिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति।
- आर्थिक सहयोग, रक्षा, सुरक्षा और क्षमता निर्माण पर चर्चा।
- ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करने पर दोनों नेताओं का जोर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इथियोपियाई प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के इतर एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच मौजूदा रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा और व्यापक बनाना था।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग, रक्षा और सुरक्षा साझेदारी, तथा क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। यह चर्चा प्रधानमंत्री मोदी की दिसंबर 2025 में अदीस अबाबा की ऐतिहासिक यात्रा के बाद संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की अफ्रीका नीति अब केवल सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सक्रिय रणनीतिक और आर्थिक गठबंधन की ओर बढ़ रही है। इथियोपिया के साथ मजबूत संबंध भारत को अफ्रीकी महाद्वीप में अपनी भू-राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने में मदद करेंगे।
भारत और इथियोपिया के बीच बढ़ता सहयोग ग्लोबल साउथ के देशों के बीच एक नए शक्ति संतुलन का संकेत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इथियोपिया की भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इथियोपिया की उपस्थिति ने 'ग्लोबल साउथ' की सामूहिक आवाज को और अधिक सशक्त बनाने में मदद की है। यह वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और इथियोपिया के संबंध दशकों पुराने हैं, लेकिन हाल के वर्षों में रक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग में तेजी आई है। दिसंबर 2025 की यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक निर्णायक मोड़ दिया था।
Frequently Asked Questions
1. यह बैठक कहाँ आयोजित की गई थी?
यह बैठक नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित की गई थी।
2. बैठक के मुख्य विषय क्या थे?
मुख्य विषयों में आर्थिक सहयोग, रक्षा, सुरक्षा और क्षमता निर्माण शामिल थे।