प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में सेमीकंडक्टर, रक्षा मिसाइल, माइनिंग और यूएई के साथ ₹1.10 लाख करोड़ के निवेश सौदे सहित कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगी, जो भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर यूएई, मलेशिया, वियतनाम और इथियोपिया के शीर्ष नेताओं के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें कीं।
- यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भारत में ₹1.10 लाख करोड़ ($15 बिलियन) के निवेश का ऐतिहासिक समझौता हुआ।
- मलेशिया के साथ सेमीकंडक्टर और पाम ऑयल, वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल रक्षा सौदे और इथियोपिया के साथ क्रिटिकल मिनरल्स माइनिंग पर रणनीतिक चर्चा हुई।
रूस के कज़ान में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने अपनी कूटनीतिक और आर्थिक ताकत का लोहा मनवाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बहुपक्षीय मंच का उपयोग विभिन्न देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए किया। सेमीकंडक्टर चिप्स की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर क्रिटिकल मिनरल्स की माइनिंग और अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों के निर्यात तक, पीएम मोदी की इन बैठकों ने वैश्विक भू-राजनीति में भारत को एक केंद्रीय खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर दिया है।
यूएई के क्राउन प्रिंस के साथ ₹1.10 लाख करोड़ की मेगा डील
इस कूटनीतिक दौरे का सबसे बड़ा आर्थिक आकर्षण संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ हुआ महा-समझौता रहा। यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और पीएम मोदी के बीच हुई विशेष बैठक में भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में ₹1.10 लाख करोड़ (लगभग 15 बिलियन डॉलर) के निवेश को अंतिम रूप दिया गया। यह निवेश भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा और भारत में लाखों नए रोजगार के अवसरों का सृजन करेगा।
मलेशिया और वियतनाम के साथ रणनीतिक रक्षा व तकनीकी साझेदारी
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ हुई बैठक में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने और पाम ऑयल के व्यापार पर गहन चर्चा हुई। मलेशिया वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पाम ऑयल निर्यातक देश है, और भारत के खाद्य तेल सुरक्षा के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। मलेशियाई पीएम ने प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक लोकप्रियता की सराहना करते हुए भारत के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
दूसरी ओर, वियतनाम के साथ बैठक पूरी तरह से रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर केंद्रित रही। दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक गतिविधियों के बीच, भारत और वियतनाम ने ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति और रक्षा उत्पादन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। यह कदम भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को और अधिक धार देने वाला साबित होगा।
Why This Matters
BozokMedia के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि भारत अब केवल बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इन मंचों का उपयोग अपने राष्ट्रीय और आर्थिक हितों को साधने के लिए एक 'प्रभावी कूटनीतिक उपकरण' के रूप में कर रहा है। यूएई का भारी निवेश और वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग यह स्पष्ट करता है कि भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनने के साथ-साथ एक मजबूत आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।
"ब्रिक्स के इतर पीएम मोदी की ये द्विपक्षीय बैठकें दर्शाती हैं कि भारत बहुपक्षीय प्रतिबद्धताओं और द्विपक्षीय आर्थिक हितों के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाने में माहिर हो चुका है।"
इथियोपिया के प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में अफ्रीका के हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र की सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम और कोबाल्ट की माइनिंग पर रणनीतिक सहमति बनी, जो भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
| देश | मुख्य फोकस क्षेत्र | रणनीतिक महत्व |
|---|---|---|
| संयुक्त अरब अमीरात (UAE) | ₹1.10 लाख करोड़ का निवेश, ऊर्जा | बुनियादी ढांचे और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास |
| मलेशिया | सेमीकंडक्टर, पाम ऑयल व्यापार | खाद्य सुरक्षा और उच्च तकनीक आपूर्ति श्रृंखला |
| वियतनाम | रक्षा सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल, समुद्री सुरक्षा | दक्षिण चीन सागर में रणनीतिक संतुलन |
| इथियोपिया | क्रिटिकल मिनरल्स माइनिंग, सुरक्षा | ईवी (EV) बैटरी निर्माण और अफ्रीकी कूटनीति |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यूएई और भारत के बीच हुए ₹1.10 लाख करोड़ के समझौते का क्या महत्व है?
उत्तर: यह समझौता भारत के बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल तकनीक के विकास में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे भारत में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
प्रश्न 2: वियतनाम के साथ भारत की रक्षा वार्ता क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: वियतनाम के साथ रक्षा और मिसाइल तकनीक साझा करना भारत की एक्ट ईस्ट नीति का हिस्सा है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए आवश्यक है।