राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के साथ द्विपक्षीय बैठक में पश्चिम एशिया में शांति बनाए रखने और संघर्षों को कूटनीति के माध्यम से सुलझाने का आह्वान किया। यह बैठक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में आयोजित की गई।
- राष्ट्रपति मुर्मू ने संघर्षों को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति को एकमात्र रास्ता बताया।
- बैठक नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई।
- भारत और ईरान के बीच मजबूत सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों पर चर्चा हुई।
- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की।
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के इतर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस बैठक के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के दौर में, विशेषकर पश्चिम एशिया में, किसी भी विवाद का समाधान केवल संवाद और कूटनीति (Dialogue and Diplomacy) के माध्यम से ही संभव है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति इस वर्ष फरवरी के अंत से बनी हुई है। हाल के दिनों में ईरान के लक्ष्यों पर अमेरिकी हवाई हमलों और वाशिंगटन द्वारा तेहरान पर आर्थिक दबाव बनाने के प्रयासों ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे संवेदनशील समय में भारत का शांति का आह्वान वैश्विक भू-राजनीति में एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
भारत-ईरान संबंधों की ऐतिहासिक गहराई
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन की भारत यात्रा उनके कार्यकाल की पहली महत्वपूर्ण यात्राओं में से एक है। राष्ट्रपति मुर्मू ने ईरान द्वारा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान दिए गए सहयोग की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और जन-जन के संबंधों पर चर्चा की, जो दोनों देशों को एक गहरे ऐतिहासिक सूत्र में बांधते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की यह भूमिका 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। एक तरफ भारत ब्रिक्स के माध्यम से वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बन रहा है, वहीं दूसरी ओर वह पश्चिम एशिया में शांति दूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, जो ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीति ही एकमात्र विकल्प है, विशेषकर तब जब वैश्विक महाशक्तियां आर्थिक और सैन्य दबाव का उपयोग कर रही हों।
Frequently Asked Questions
1. राष्ट्रपति मुर्मू और पेज़ेश्कियन की मुलाकात कहाँ हुई?
यह मुलाकात नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति भवन में हुई।
2. भारत ने पश्चिम एशिया के बारे में क्या रुख अपनाया है?
भारत ने स्पष्ट किया है कि संघर्षों को सैन्य बल के बजाय बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।