अमेरिकी सेना जर्मनी में आयोजित सैन्य अभ्यासों के दौरान यूक्रेन के युद्ध अनुभवों का उपयोग कर अपनी ड्रोन क्षमताओं को आधुनिक बना रही है। हालांकि तकनीकी प्रगति तेज है, लेकिन सेना के भीतर ड्रोन युद्ध के संगठनात्मक ढांचे को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
- अमेरिकी सेना जर्मनी में यूक्रेन के युद्ध अनुभवों के आधार पर 1,900 ड्रोन का परीक्षण कर रही है।
- हालिया अभ्यासों में लगभग 50% मुठभेड़ें 'ड्रोन कॉन्टैक्ट फर्स्ट' (सबसे पहले ड्रोन संपर्क) के साथ शुरू हुईं।
- एक अलग 'ड्रोन कोर' बनाने बनाम मौजूदा पैदल सेना में ड्रोन को शामिल करने पर आंतरिक बहस जारी है।
- अमेरिकी सेना में नेतृत्व परिवर्तन के कारण कुछ विशेष ड्रोन प्रयोग इकाइयों को बंद कर दिया गया है।
बवेरिया की पहाड़ियों के धूल भरे रास्तों पर, अमेरिकी सेना अपनी युद्ध रणनीति में एक बड़ा बदलाव कर रही है। जर्मनी में आयोजित 'सेबर जंक्शन' (Saber Junction) अभ्यास के दौरान, 173वें एयरबोर्न ब्रिगेड ने उन ड्रोन तकनीकों को आजमाया है जो सीधे यूक्रेन-रूस युद्ध के मैदान से ली गई हैं। यह प्रयास दर्शाता है कि वाशिंगटन अपनी जमीनी इकाइयों में ड्रोन क्षमताओं को तेजी से एकीकृत करने की कोशिश कर रहा है।
प्रशिक्षण इकाई का नेतृत्व कर रहे ब्रिगेड जनरल टेरी टिलिस ने बताया कि वे लगभग 1,900 ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं, जो "यूक्रेनी प्रयासों से सीखी गई नवीनतम बातों" का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस सहयोग के तहत, यूक्रेन के सैन्य विशेषज्ञ जर्मनी पहुंचे हैं ताकि वे इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और ड्रोन ऑपरेशंस पर अमेरिकी सैनिकों को सलाह दे सकें। सेना के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एंथनी मिलर के अनुसार, अभ्यास के दौरान विपक्षी सैनिकों के साथ होने वाली आधी मुठभेड़ें सबसे पहले ड्रोन के माध्यम से शुरू हुईं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि अमेरिका केवल यूक्रेन की नकल नहीं कर रहा है, बल्कि वह एक महाशक्ति के संसाधनों को यूक्रेन की 'असिमेट्रिक' (असंतुलित) युद्ध शैली के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है। मुख्य विवाद इस बात पर है कि क्या ड्रोन के लिए एक अलग सैन्य शाखा बनाई जाए या उन्हें पैदल सेना (Infantry) का हिस्सा बनाया जाए। यह स्थिति एक ऐसी सेना को दर्शाती है जो यह तय करने की कोशिश कर रही है कि निरंतर हवाई निगरानी के युग में 'फ्रंटलाइन' की परिभाषा क्या होगी।
कंपनी स्तर पर 'वन-वे अटैक ड्रोन' का एकीकरण इस बात का संकेत है कि ड्रोन अब केवल सहायता उपकरण नहीं, बल्कि प्राथमिक लड़ाकू हथियार बन गए हैं।
हालांकि, इस आधुनिकीकरण की राह आसान नहीं रही है। जनरल रैंडी जॉर्ज और सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल जैसे अधिकारियों के हटने से, जिन्होंने ड्रोन प्रयोगों का पुरजोर समर्थन किया था, एक नेतृत्व शून्य पैदा हो गया है। हाल ही में जनरल क्रिस्टोफर लानेवे द्वारा एक विशेष ड्रोन यूनिट को वापस पारंपरिक पैदल सेना में बदलने के आदेश ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या ये प्रयोग दीर्घकालिक समाधान हैं या नहीं।
ऐतिहासिक रूप से, अमेरिकी सेना भारी गोलाबारी और पारंपरिक शक्ति पर निर्भर रही है। लेकिन यूक्रेन युद्ध ने साबित कर दिया है कि सस्ते, व्यावसायिक ड्रोन महंगे टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट कर सकते हैं। यूक्रेनी सलाहकारों की मदद से, अमेरिका पारंपरिक खरीद और परीक्षण चक्रों को दरकिनार कर सीधे युद्धक्षेत्र की तैयारी करना चाहता है।
| विशेषता | पारंपरिक अमेरिकी सिद्धांत | यूक्रेन-प्रेरित मॉडल |
|---|---|---|
| ड्रोन की भूमिका | खुफिया जानकारी और निगरानी (ISR) | सीधा हमला और सामरिक नुकसान |
| कमांड संरचना | केंद्रीकृत उच्च-स्तरीय संपत्ति | विकेंद्रीकृत कंपनी-स्तरीय उपयोग |
| मुठभेड़ का तरीका | तोपखाना/पैदल सेना पहले | ड्रोन संपर्क सबसे पहले |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या अमेरिकी सैनिकों को प्रशिक्षण के लिए यूक्रेन भेजा जा रहा है?
उत्तर: हाँ, 173वें एयरबोर्न ब्रिगेड के कुछ सैनिकों को इस साल की शुरुआत में सीधे युद्धक्षेत्र से ड्रोन युद्ध सीखने के लिए यूक्रेन भेजा गया था।
प्रश्न: अमेरिकी सेना ने कुछ ड्रोन प्रयोगों को क्यों रोका?
उत्तर: आधिकारिक तौर पर इसे योजना का हिस्सा बताया गया है, लेकिन यह नेतृत्व परिवर्तन के बाद हुआ, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि सेना के भीतर ड्रोन यूनिट्स के भविष्य को लेकर मतभेद हैं।